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हिन्दू धर्मग्रन्थ और समरस समाज

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हरिद्वार, उत्तर प्रदेश

साजिश के तहत हमारे धर्मग्रंथों में ऐसे विषय डाल दिए गए है जो हिन्दू धर्म और और मान्यताओं के विरुद्ध हैं। इसमें स्त्रियों और अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के लिए अपमानजनक बातें भी शामिल हैं। अब समय आ गया है कि इस प्रक्षिप्त खर पतवार को ढूंढ कर धर्मग्रंथों से निकाल देना चाहिए। 30 अक्तूबर को हरिद्वार में योगऋषि बाबा रामदेव जी की अध्यक्षता में अनेक पूज्य संतों और विद्वानों का सम्मेलन हुआ। इसमें देश के सब पंथों के संत पधारे। गोष्ठी का विषय रहा कि हिन्दुओं के धार्मिक ग्रंथों में बदनीयती से डाले हुए प्रक्षिप्त प्रसंगों को खोजना और उन्हें निकाल कर ग्रंथों को शुद्ध करना।

इसके लिए पूज्य स्वामी परमात्मानंद सरस्वती जी और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी की अध्यक्षता में दो समितियां भी बनाई गई हैं। हिन्दू परिषद भी इसमें सहभागी होगा।


गोष्ठी में विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि ऐसे अंशों को निकालना ही चाहिए। हमारा संविधान समानता, बंधुता और गरिमा का प्रत्येक व्यक्ति को अधिकार देता है। यह हमारे अध्यात्म के अनुरूप है क्योंकि सब मनुष्यों के शरीर भी भगवान ने बनाए हैं और भगवान सबके हृदय में भी रहते हैं। इसलिए अगर किसी ग्रंथ में ऐसा जिक्र आता भी है जो मनुष्य की समानता और बंधुता के खिलाफ हो तो आज का हिन्दू समाज उसको अस्वीकार करने की स्पष्ट घोषणा करे।

पतंजलि विश्वविद्यालय में 52nd All India Oriental Conference में भारत के सभी शीर्ष धर्मगुरु उपस्थित रहे। सभी लोगों का एक ही लक्ष्य है कि सनातन धर्म पर जो घात-प्रतिघात हो रहा है, इससे सनातन धर्म की रक्षा की जाए।