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जीएम कपास बीजी 1 व बीजी 2 फेल तो उनकी कीमत तय करने की आवश्यकता क्यों – भारतीय किसान संघ

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नई दिल्ली

भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने जीएम कपास बीजी 1 और बीजी 2 के अधिकतम विक्रय मूल्य निर्धारण करने को लेकर प्रश्न खड़े करते हुए प्रक्रिया को सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा कि जब सभी स्वीकार करते हैं कि बीटी कपास फेल हो चुका है तो उसकी कीमत कैसे और क्यों तय करना। जब मोनसेंटो ने स्वयं घोषणा की कि वर्ष 2002 में आया बीजी1 वर्ष 2005 में फेल हो गया है। साथ ही सरकार और कंपनी ने भी माना है कि बीजी2 जो 2006 में आया था, वह भी 2009 में फेल हो गया है। जिसके फेल होने का कारण मुख्य कीड़े में प्रतिरोध क्षमता विकसित होना बताया गया था।

जीएम बीजी1 व बीजी2 बीज किसानों की आत्महत्या के लिए जिम्मेदार

महामंत्री ने कहा कि मोनसेंटो व सेंट्र्ल इंस्टीट्यूट फॉर कॉटन रिसर्च ने माना है बीटी कपास का लक्ष्य था, पिंक बॉलवर्म  को मारना, लेकिन दो साल में पिंक बॉलवर्म  ने प्रतिरोधक क्षमता पैदा कर ली और फसल फेल हो गई। फिर पिंक बॉलवर्म  के साथ साथ नए चूसने वाले कीड़ों की संख्या बढ़ने लगी और दवाईयों का छिड़काव बढ़ गया। जिससे बीजी1 व बीजी2 की उत्पादन लाग वृद्धि होने के बावजूद उसकी उत्पादकता में कमी आने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। परिणामस्वरूप किसानों को आत्महत्या जैसे गंभीर कदम उठाने लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने प्रश्न किया कि जब बीज खराब थे तो उन्हें बाजार से वापस क्यों नहीं लिया गया। जबकि आत्महत्या करने वाले किसानों में बहुतायत संख्या बीटी कॉटन की खेती करने वाले किसानों की है।

विडंबना है कि खराब बीज बेचने वाले रॉयल्टी लेते रहे जो अभी भी जारी है और सरकार है कि फेल व खराब बीजों के विक्रय रेट तय करने में लगी है। जबकि 2014 में कर्नाटक में महिको कंपनी को खराब बीज सप्लाय करने पर प्रतिबंध का सामना करना पड़ा। जिसमें सामने आया था कि पिंक बॉलवर्म को नियंत्रित करने में कोई परिणाम नहीं आए और तकनीक अस्थिर, मंहगी व कम उत्पादन देने वाली है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा कपास किसानों के नुकसान की भरपाई हेतु मुआवजा देना इसका बड़ा उदाहरण है।

भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट कहा कि देश की जिम्मेदार सरकार से किसानों को इन खराब बीजों को उपलब्ध कराने के लिये किसान संघ कैसे कह सकता है। महामंत्री ने मांग की कि विफल जीएम बीजों की सप्लायर कंपनी के खिलाफ तुरंत कार्यवाही करनी चाहिए। बाजार से बीज वापस कराकर इन कंपनियों के बड़े अधिकारियों पर जेल जैसी कड़ी सजा का प्रावधान किया जाना चाहिए। इन बीजों के मुफ्त वितरण पर प्रतिबंध लगाकर नॉन जीएम व कम दाम में उपलब्ध अधिक पैदावार वाली वैराइटी किसानों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था सरकार को करना चाहिए।

दादा लाड कपास तकनीक अपनाने का दिया सुझाव

किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने सुझाव दिया कि सरकार जीएम बीजों के बजाय नॉन जीएम हाइब्रिड कपास बीजों के विकास, उनके उत्पादन व वितरण के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था करे। घरेलू जरूरतों को मैनेज करने व निर्यात की दृष्टि से नॉन जीएम कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए आईसीएआर से प्रमाणित “दादा लाड कपास तकनीक” अपनाने की सलाह दी। जिसमें कपास की पैदावार तीन सौ प्रतिशत तक बढ़ जाती है।