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‘मैं’ नहीं, ‘हम’ की भावना से ही भारत बनेगा सशक्त – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

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शाजापुर, मध्य प्रदेश

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त शाजापुर में प्रमुख जन गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी रहे। गोष्ठी में 247 प्रमुख जनों की सहभागिता रही।

मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि प्रत्येक भारतीय को स्वयं से यह प्रश्न करना चाहिए कि हम कौन हैं?” हमारी पहचान केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आध्यात्मिक भी है। भारतीय समाज की मूल भावना मैंनहीं, बल्कि हमकी है, जो समाज को एकसूत्र में बांधती है।

भारत की प्राचीन समृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा कि अपना देश केवल कृषि प्रधान ही नहीं, बल्कि वस्त्र, चमड़ा, इत्र एवं आयुध निर्माण जैसे अनेक क्षेत्रों में अग्रणी रहा है। ये सभी कार्य मुख्यतः कुटीर उद्योग के रूप में संचालित होते थे, जो स्वाभाविक रूप से कौशल विकास का कार्य करते थे।

भारतीय परिवार व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि पारंपरिक व्यवस्था में पुरुष आजीविका अर्जित करते थे, जबकि महिलाएं घर की अर्थव्यवस्था का संचालन करती थीं। इसी कारण भारतीय संस्कृति में स्त्री को गृह लक्ष्मीका स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारतीय चिंतन त्याग, कृतज्ञता एवं समर्पण पर आधारित है, जहां समाज से लेने के बजाय समाज को लौटाने की भावना प्रमुख रही है। पश्चिमी प्रभाव के कारण भोगवाद और शहरीकरण बढ़ा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, फिर भी भारत की सांस्कृतिक आत्मा आज भी जीवंत है।

डॉ. वैद्य ने भारतीय जीवन पद्धति के आध्यात्मिक आधार पर प्रकाश डालते हुए कर्मयोग, भक्ति योग, ज्ञान योग एवं राज योग को मोक्ष प्राप्ति के प्रमुख मार्ग बताया। आधुनिक भारत में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश अपनी सांस्कृतिक पहचान के आधार पर विश्व में उभर रहा है। किंग्स वेका कर्तव्य पथमें परिवर्तन तथा न्याय आधारित व्यवस्थाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

उन्होंने पंच परिवर्तनकी आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि समाज को उत्कृष्ट, समृद्ध एवं संगठित बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने उपस्थित सभी जनों से मैंसे ऊपर उठकर हमकी भावना अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में विभाग संघचालक अजय जी गुप्ता और जिला संघचालक हुकुम सिंह धनगर भी मंच पर उपस्थित रहे। गोष्ठी का समापन राष्ट्रहित और समाज उत्थान के संकल्प के साथ हुआ।