भोपाल
भारतीय शिक्षण मंडल के 57वें स्थापना दिवस पर भोपाल महानगर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में ‘शिक्षा में संस्कार : राष्ट्र निर्माण का आधार’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानन्द ने कहा कि भारतीय शिक्षा भविष्य में विश्व कल्याण का माध्यम बनने वाली है। युद्धों और हिंसा से विश्व को मुक्त कराना है तो वह भारत द्वारा और भारतीय शिक्षा के माध्यम से ही होगा।
समन्वय भवन में आयोजन के मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक थे।
बी.आर. शंकरानन्द ने कहा कि भारत को शक्तिशाली बनाना है तो यह शिक्षा के बिना संभव नहीं हो सकता। भारत एक नया अवतार लेकर विश्व के सामने प्रकट होने जा रहा है। इस संधिकाल में समाज को और अधिक सजग रहने की आवश्यकता है। 190 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में हम गलत दिशा में चल रहे हैं। अब हमें अपने मार्ग पर चलना है और समाज को भ्रमित दिशा से बाहर निकालना है। शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य निर्माण के साथ मनुष्य को निर्भय बनाना भी है। भारतीय शिक्षण मंडल इसके लिए कार्य कर रहा है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि भारतीय शिक्षण मंडल राष्ट्र के जागरण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय है। पूरे देश में म.प्र. पहला राज्य है, जहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी भाषा में शुरू हुई है। संस्कार के बिना शिक्षा का कोई मूल्य नहीं है। आज समाज संस्कारों को भूलता जा रहा है। यह ठीक नहीं है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डॉ. संजय पाठक ने कहा कि संगठन भारतीय शिक्षा को पुनर्स्थापित करने के लिए 1969 से कार्य कर रहा है। देश जब स्वतंत्र हुआ, तो उस समय की अपेक्षा आज विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, विद्यालयों आदि की संख्या बढ़ी है। इससे शिक्षा का व्याप भी बढ़ा है। हमने अपना भौतिक पक्ष सुदृढ़ किया है, लेकिन आध्यात्मिक जीवन सुदृढ़ नहीं किया। दोनों पक्षों को सुदृढ़ करने का कार्य हमने कितना किया है, यह आत्म चिंतन का विषय है। एक मनुष्य के रूप में हमारी प्रगति तभी संभव है, जबकि दोनों पक्षों में संतुलन बनाते हुए इन्हें सुदृढ़ करने का कार्य करने में हम सक्षम हो सकेंगे।
कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलगुरु, शिक्षक, विद्यार्थी, युवा, मातृशक्ति सहित विभिन्न क्षेत्रों के विद्वान उपस्थित रहे।



