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“भारतीय नारी सारे विश्व में अग्रणी होकर अपना परचम लहरा रही है - मुकुल कानिटकर जी

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 नई दिल्ली

राष्ट्र सेविका समिति, दिल्ली प्रांत के प्रबुद्ध वर्ग मेधाविनी सिंधु सृजन द्वारा वंदनीया लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) के जन्म दिवस पर “संकल्प दिवस” का आयोजन सर शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल, विश्वविद्यालय मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। इस अवसर पर वंदनीया मौसीजी के राष्ट्रजीवन, नारी जागरण और समाजसेवा के आदर्शों का स्मरण करते हुए उपस्थित जनों ने समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों के निर्वहन का पुनः संकल्प किया।

राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह कार्यवाहिका अलका ईनामदार जी ने मुख्य वक्ता के रूप में मार्गदर्शन दिया। मुख्य अतिथि राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर जी, कार्यक्रम अध्यक्ष सांसद बांसुरी स्वराज जी, विशिष्ट अतिथि अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर जी, डूटा के अध्यक्ष प्रो. वी. एस. नेगी जी सहित अन्य अतिथियों ने राष्ट्र निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका पर अपने विचार रखे। मेधाविनी की प्रान्त संयोजिका प्रो. निशा राणा जी ने विषय की प्रस्तावना रखी।

कार्यक्रम में समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली नौ महिलाओं का सम्मान किया गया तथा उपस्थित जनों ने सेवा, संस्कार और राष्ट्र समर्पण की परंपरा को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया।

मुख्य वक्ता अलका ईनामदार जी ने कहा कि विश्व में आज सबसे बड़ा महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति है, जिसकी देशभर में 5000 शाखाएं हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुत्व हमारी पहचान और हमारे राष्ट्र की भी पहचान है। महिला का प्रथम कर्तव्य है अगली पीढ़ी को संस्कार देना।

विजय रहाटकर जी ने कहा कि जब देश की महिला संकल्प लेती है, तब समझ ही नहीं पूरा देश बदल जाता है। दुनिया भारत की ताकत अर्थव्यवस्था से नहीं मातृशक्ति से नापेगी। विकसित भारत 2047 पूरे भारत का संकल्प है। महिलाएं हर क्षेत्र साइंस, स्पेस, टेक्नोलॉजी, मेडिसिन सहित अन्य में सबसे आगे हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रचार टोली के सदस्य मुकुल कानिटकर जी ने कहा कि “भारतीय नारी सारे विश्व में अग्रणी होकर अपना परचम लहरा रही है। आने वाली शताब्दी मातृशक्ति की शताब्दी है। आधुनिक होने के लिए प्राचीनता छोड़नी नहीं पड़ती। जिसकी पूजा करते हैं, उसके जैसा बनना ही पूजा है”।

सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि ‘जब व्यक्ति अपनी वास्तविकता से परिचित होता है, तब उसकी जड़ें कोई नहीं हिला सकता। नारीवाद और समानता पाश्चात्य से गोद लेने की जरूरत नहीं है। मातृत्व, कर्तृत्व और नेतृत्व से महिला इस देश की निर्माता होगी। महिला गुरु व ईंट की भूमिका निभाती है, जिससे राष्ट्र की नींव बनने वाली है’।