स्वामी दयानंद सरस्वती जी के प्रमुख विचार
राष्ट्र-चेतना के अग्रदूत स्वामी दयानंद सरस्वती पर विभिन्न विद्वानों के विचार...
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एनी बेसेंट अपनी पुस्तक 'India: A Nation' में लिखती हैं
“स्वामी दयानंद सरस्वती वह पहले विचारक थे जिन्होंने निर्भीक स्वर में यह घोषणा की भारत भारतीयों का है"
एनी बेसेंट ने कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में कहा था "जब स्वराज का मन्दिर बनेगा उसमें अनेक महान नेताओं की मूर्तियाँ होंगी, परंतु सबसे ऊँची मूर्ति महर्षि दयानंद की होगी"
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महान क्रांतिकारी स्वातंत्र्य वीर सावरकर के शब्दों में...
“महर्षि दयानंद स्वाधीनता संग्राम के सर्वप्रथम योद्धा थे और हिन्दू जाति के सच्चे रक्षक थे"
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श्रीमती इंदिरा गांधी ने महर्षि दयानंद के योगदान को स्मरण करते हुए कहा था...
“हमारे देश ने अनेक महापुरुषों और समाज सुधारकों को जन्म दिया है जिनमें महर्षि दयानंद का स्थान अत्यंत ऊँचा है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज में फैले अंधविश्वास और विशेष रूप से ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के पुनः अध्ययन का जो संदेश दिया, आज उतना ही आवश्यक है कि हम उनके विचारों को सही संदर्भ में समझें और अपनाएँ"
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बाबू जगजीवन राम के अनुसार -
“आर्य समाज का समाज सुधार के क्षेत्र में ऐतिहासिक योगदान रहा है महर्षि दयानंद के सिद्धांतों और आदर्शों के प्रचार से समानता पर आधारित, जाति-पाति से मुक्त समाज के निर्माण की चेतना जागृत होती है"
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश में स्वामी दयानंद...
“जिस समय हमारी परंपराएँ और आध्यात्मिक मूल्य क्षीण हो रहे थे उस समय स्वामी दयानंद ने 'वेदों की ओर लौटो' का आह्वान किया। महर्षि दयानंद केवल वैदिक ऋषि ही नहीं, बल्कि राष्ट्रऋषि भी थे"