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नैनीताल की सीमा आर्या बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

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नैनीताल, उत्तर प्रदेश 

कभी दूसरों पर निर्भर रहने वाली हल्दूचौड़ की सीमा आर्या ने अपनी मेहनत और साहस से आत्मनिर्भरता की ऐसी कहानी लिख दी है, जो हर महिला को प्रेरणा देती है। सीमित संसाधनों के बीच राज्य सरकार की योजना के तहत जब उन्हें 75,000 रुपये की सहायता राशि मिली तो वही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। सीमा ने इन पैसों को केवल पूंजी नहीं अपितु नए जीवन की चाबी माना। उन्होंने इसी पूंजी से साइकिल रिपेयरिंग और टायर वर्क की दुकान शुरू की। उन्होंने अपनी किस्मत एक ऐसी क्षेत्र में अजमायी जिस क्षेत्र में अक्सर महिलाएँ जाने से भी कतराती हैं। कंप्रेशर और टायर खरीदकर उन्होंने हिम्मत और लगन से काम शुरू किया। परिणाम यह हुआ कि आज सीमा प्रति माह लगभग 20 से 22 हजार रुपये की स्थिर आय अर्जित कर रही हैं। लेकिन सीमा की कहानी यहीं तक सीमित नहीं। उन्होंने अपने व्यवसाय से दो अन्य युवाओं को भी रोजगार दिया है। यानी एक महिला ने न केवल अपना भविष्य संवारा, अपितु दूसरों के जीवन में भी रोजगार और उम्मीद का दीप जलाया। सीमा खुद कहती हैं, 'यह योजना मेरे लिए केवल आर्थिक मदद नहीं, अपितु नया जीवन देने वाली संजीवनी है। इसने मुझे आत्मनिर्भर बनने का मार्ग दिखाया और अपने पैरों पर खड़ा होने का आत्मविश्वास दिया।' सीमा आर्या का यह उदाहरण साबित करता है कि जब सरकार की योजनायें जमीनी स्तर पर ईमानदारी से लागू हों और लोग संकल्प के साथ उसे अपनाएँ, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होना निश्चित है।