महाकुंभ 2025 के अद्भुत समागम में एक नहीं बल्कि चार विश्व रिकार्ड बने
महाकुंभ 2025: 15,000 सफाई कर्मियों ने रचा कीर्तिमान!
सनातन संस्कृति के महासंगम, महाकुंभ 2025 में, एक ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित हुआ! 15,000 सफाई कर्मियों ने मिलकर 10 किलोमीटर लंबे घाट को स्वच्छ बना दिया। यह महज सफाई नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण की अद्भुत मिसाल है! धर्म और आस्था के इस महापर्व में, स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा गया। देशभर से आए 15,000 सफाई कर्मियों ने दिन-रात मेहनत कर, संगम तट को स्वच्छ और सुंदर बनाया। इन कर्मवीरों की मेहनत ने सिद्ध कर दिया कि ‘स्वच्छता ही सेवा’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है। इस महायज्ञ में आस्था के साथ-साथ स्वच्छता भी केंद्र में रही। सफाई कर्मियों की इस अविस्मरणीय सेवा को नमन! आइए, हम भी संकल्प लें – स्वच्छता को बनाए रखने का, ताकि हर महाकुंभ और भी भव्य और पावन बने!
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दूसरा उदाहरण -
महाकुंभ 2025: परेड मैदान पर 1000 ई-रिक्शा का विश्व रिकॉर्ड!
महाकुंभ 2025 – एक और ऐतिहासिक क्षण! परेड मैदान पर हुआ वो आयोजन, जिसने रचा विश्व रिकॉर्ड! 1000 ई-रिक्शा के सफल संचालन के साथ महाकुंभ ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई मिसाल कायम की। पहली बार किसी धार्मिक महाकुंभ में इतनी बड़ी संख्या में ई-रिक्शा का संचालन हुआ। यह कदम न सिर्फ श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए था, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल भी है। धार्मिक आस्था के इस पावन अवसर पर, स्वच्छ और हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए प्रशासन ने 1000 ई-रिक्शा तैनात किए। इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को सुविधा मिली, बल्कि ध्वनि और वायु प्रदूषण भी कम हुआ। श्रद्धालुओं के लिए ये ई-रिक्शा किसी वरदान से कम नहीं! पैदल चलने में असमर्थ लोगों, बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह सेवा बेहद लाभकारी साबित हुई। आइए, हम भी पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लें और इस पवित्र धरा को स्वच्छ और हरित बनाए रखें
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तीसरा
महाकुंभ 2025: 10,000 से अधिक लोगों ने 8 घंटे में हैंड पेंटिंग बनाकर रचा इतिहास!
महाकुंभ 2025 – जहां आस्था, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला! इस बार एक अनोखा इतिहास रचा गया, जब 10,000 से अधिक लोगों ने एक साथ हैंड पेंटिंग बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया! रंगों के इस महायज्ञ में श्रद्धालु, कलाकार और पर्यटक एक साथ जुड़े। 8 घंटे की अथक मेहनत से तैयार इस भव्य हैंड पेंटिंग ने महाकुंभ के संदेश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। हाथों की छाप से उकेरी गई यह कलाकृति केवल रंगों की रचना नहीं, बल्कि आस्था, एकता और संस्कृति का जीवंत प्रमाण है। हर छवि, हर रंग महाकुंभ की आध्यात्मिक ऊर्जा को दर्शा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल में भाग लेने वाले हर व्यक्ति के चेहरे पर गर्व और उत्साह साफ झलक रहा था। हर किसी ने अपनी अनूठी छाप छोड़कर इस पवित्र आयोजन को और भी खास बना दिया। आइए, हम भी अपनी संस्कृति और कला को सहेजने का संकल्प लें!
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चौथा -
33 दिन तक हुआ रुद्री पाठ संहिता का 11,151 बार पाटन, 26 लाख से ज्यादा मंत्रोच्चारण!
महाकुंभ 2025 – जहां भक्ति, साधना और आस्था का महासंगम देखने को मिला! इस बार एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जब पूरे 33 दिनों तक लगातार रुद्री पाठ संहिता का 11,151 बार पाटन किया गया, और 26 लाख से अधिक बार रुद्री पाठ का मंत्रोच्चारण हुआ। भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्ति के लिए रुद्री पाठ का अत्यंत महत्व है। महाकुंभ के इस पावन अवसर पर हज़ारों संतों और श्रद्धालुओं ने मिलकर इस ऐतिहासिक आयोजन को संभव बनाया। 33 दिनों तक निरंतर चले इस अनुष्ठान में वैदिक परंपरा का भव्य प्रदर्शन हुआ। शिव भक्ति का यह महासमर हमें जीवनभर प्रेरणा देता रहेगा। हर हर महादेव!