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सरिता पपोला बनीं महिला सशक्तीकरण की प्रेरणा

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बागेश्वर, उत्तराखण्ड

पहाड़ की संकरी गलियां और इन गलियों में दौड़ती एक स्कूटी जिस पर बैठी हैं सरिता पपोला, जो अब बागेश्वर की पहचान बन चुकी हैं। कभी सरिता का दिन घर की जिम्मेदारियों और बच्चों की परवरिश में ही बीतता था लेकिन मन में कुछ अलग करने का सपना भी था। अपने सपने को सच करने के लिए सरिता ने एक एनजीओ से जुड़कर काम शुरू किया यहीं से उन्हें बाहरी दुनिया की समझ मिली और आत्मविश्वास भी बढ़ा। फिर आया वो फैसला, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। डिलीवरी वुमन बनने का फैसला। शुरुआत आसान नहीं थी लेकिन हौसले के आगे हर मुश्किल छोटी पड़ गई। सरिता की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी बड़ा योगदान है उनके पति, जो पेशे से वकील हैं हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे। आज सरिता बिना किसी झिझक के घर-घर सामान पहुंचा रही हैं और साथ ही यह संदेश भी दे रही हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। बागेश्वर की इन गलियों में अब सरिता सिर्फ एक डिलीवरी वुमन नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की पहचान बन चुकी हैं। उनकी कहानी हर उस महिला के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को हकीकत में बदलना चाहती है।