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भारतीय संस्कृति से परिचित होंगे छात्र, प्रदेशभर में शुरू होंगी कार्यशालाएं

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स्कूली बच्चों को भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान से जोड़ने के लिए एक सराहनीय पहल की जा रही है। अंतरराष्ट्रीय रामायण एवं वैदिक शोध संस्थान अब यूपी के सभी 75 जिलों में विशेष कार्यशालाओं का आयोजन करने जा रहा है, जिससे बच्चे हमारी परंपराओं को बेहतर तरीके से समझ सकें।

जानकारी के अनुसार, संस्थान द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से मई माह से यह कार्यशालाएं शुरू की जाएंगी। हर जिले के एक स्कूल का चयन किया जाएगा, जहां 5 से 10 दिनों तक अलग-अलग प्रकार की गतिविधियां कराई जाएंगी। इन कार्यशालाओं का उद्देश्य बच्चों को रामायण, वेद और उपनिषद जैसे महत्वपूर्ण ग्रंथों से सरल और रोचक तरीके से परिचित कराना है।

इन कार्यशालाओं की खास बात यह है कि इनमें केवल किताबों तक सीमित ज्ञान नहीं होगा, बल्कि बच्चों को व्यावहारिक रूप से भी सीखने का मौका मिलेगा। बच्चों को मुखौटे, मुकुट, तीर-धनुष जैसे पारंपरिक वस्त्र और सामग्री बनाना सिखाया जाएगा। साथ ही रामलीला की प्रस्तुति, रामचरितमानस का गायन, वेदगान, सामान्य ज्ञान और चित्रकला जैसी गतिविधियां भी कराई जाएंगी।

संस्थान के सलाहकार डा. आशुतोष द्विवेदी के अनुसार, आज के समय में कई बच्चे इन ग्रंथों के बारे में सीमित जानकारी रखते हैं। ऐसे में यह पहल उन्हें भारतीय संस्कृति की गहराई और व्यापकता से जोड़ने में मदद करेगी।

प्रस्ताव को जल्द ही शासन को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद जिला स्तर पर अधिकारियों के माध्यम से स्कूलों का चयन कर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह पहल बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने, उनकी रचनात्मकता बढ़ाने और भारतीय संस्कृति के प्रति समझ विकसित करने की दिशा में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।