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हरिद्वार के गंगा घाट पर तमन्ना बनी 'नेहा', विधि-विधान से हुई घर वापसी

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हरिद्वार, उत्तराखण्ड

 गंगा में पवित्र डुबकी, कलाई पर सजता वैदिक कलावाऔर गूंजते मंत्रों के बीच हुआ सनातन का महा-स्वागत। जब असत्य के बादल छंटते हैं, तो सत्य का सूर्य ऐसे ही उजागर होता है। ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रही तमन्ना पिछले 3 महीनों से हरिद्वार में थी। सोशल मीडिया पर सनातन संस्कृति की रील्स और गंगा आरती की दिव्यता देखी, तो अंतरात्मा जाग उठी। खोज शुरू हुई, सत्य से साक्षात्कार हुआ और उन्होंने निर्णय किया- अपनी जड़ों और अपने पूर्वजों की परंपरा की ओर लौटने का। 

बस फिर क्या था, शनिवार को हरिद्वार के ब्रह्मकुंड पर संपूर्ण विधि-विधान से गृहवापसी संस्कार हुआ। संतों ने पुष्पवर्षा की, भगवा अंगवस्त्र पहनाया और विधिवत घोषणा की- अब तमन्ना इस्लाम से नहीं, बल्कि अपनी नई सनातनी पहचान 'नेहा' के नाम से जानी जाएगी।

बाबा हठयोगी महाराज ने स्पष्ट संदेश दिया कि इतिहास के काले अध्यायों में भय और अत्याचार से जिन लोगों को अपने मूल धर्म से दूर किया गया था, आज अगर वे अपनी इच्छा से लौट रहे हैं, तो यह पूरे सनातन समाज के लिए स्वाभिमान का पर्व है।