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हिन्दू समाज ही भारत के अच्छे भविष्य के लिए जिम्मेदार है - डॉ. मोहन भागवत जी

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गंगापुर, छत्रपति संभाजीनगर 

हिन्दू धर्म, परंपरा, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा हेतु  हिन्दू सम्मेलन समिति, गंगापुर ने भव्य “हिन्दू सम्मेलन” का आयोजन किया। हिन्दू सम्मेलन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हमें एक ऐसा बलशाली और चरित्रवान समाज बनाना है, जिससे दुनिया भी प्रभावित हो। इसके लिए हमें अपना स्वभाव और आचरण बदलना होगा। हिन्दू समाज ही भारत के अच्छे भविष्य के लिए जिम्मेदार है। इसलिए अच्छा परिवर्तन चाहिए तो स्वयं से शुरू करना होगा। उन्होंने पंच परिवर्तन का विषय सम्मेलन में उपस्थित समाज के समक्ष रखा।

गंगापुर के जिला परिषद स्कूल के मैदान में आयोजित हिन्दू सम्मेलन संतों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में ह . भ. प. गुरुवर्य भास्करगिरि जी महाराज (श्री क्षेत्र देवगढ़ संस्थान), ह. भ. प. गुरुवर्य महंत रामगिरि जी महाराज (मठाधीश, गोवर्धन धाम, श्री क्षेत्र सरलाबेट), जगद्गुरु श्री श्री 1008 स्वामी शांतिगिरि जी महाराज (जगद्गुरु श्री जनार्दन स्वामी आश्रम, श्री क्षेत्र वेरुल) उपस्थित रहे।

सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि हम समाज को बदलना चाहते हैं। उसके लिए हमें मिलकर काम करना होगा। सिर्फ बातों में नहीं, बल्कि कृति चाहिए। उसके लिए हमें सभी जाति-वर्गों में दोस्ती करनी चाहिए। सबसे सद्भावना होनी चाहिए। परिवार में हमारे संस्कृति और परम्परा पर बात होनी चाहिए। हमें ध्यान रखना चाहिए कि अपना जीवन जीते हुए पर्यावरण को नुकसान न हो। हमें विदेशी सामान का प्रयोग  करने के बजाय देसी वस्तुओं को प्रधान्य देना चाहिए। हमें आत्मनिर्भर बनना है। अगर हम आत्मनिर्भर बनेंगे, तो हमारी शक्ति का महत्व होगा। अगर ये सभी बातें कृति में लाई जाएं, तो हमारा समाज सुरक्षित, संपन्न बनेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित संतों ने आशीर्वचन दिया। उन्होंने समाज को सद्भाव और कुटुंब प्रबोधन का महत्व बताया। भास्करगिरि जी महाराज ने कहा, “संघ ने सौ साल तक अनेक अपमान सहते हुए यात्रा की। उन्होंने जाति के आधार पर बंटे हिन्दू समाज को संगठित किया। उन्होंने हिन्दू समाज से सामाजिक एकता बनाए रखते हुए आगे बढ़ने का आह्वान किया। महंत रामगिरि जी महाराज ने बांग्लादेश में हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों की ओर ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि हमें संगठित रहना होगा। हमें अपने समाज से जातिवाद को पूरी तरह खत्म करना होगा। महंत शांतिगिरि जी महाराज ने कहा कि समाज को अपनी संस्कृति का पालन करना जरूरी है। विदेशी संस्कृति से प्रभावित होने के कारण हमारी पीढ़ी गलत रास्ते पर जा रही है। अपने परिवार को संस्कारी परिवार बनाएं, जिससे हमारा समाज अच्छा रहेगा। गाथामूर्ति रामभाऊ जी महाराज ने लिखित स्वरूप में आशीर्वाद संदेश भेजा था। उन्होंने कहा कि समाज को इस कार्यक्रम का उद्देश्य पूरा करके संतों के संदेश पर काम करना चाहिए।