धनबाद, झारखण्ड
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए संघ गत 100 वर्षों से कार्य कर रहा है। समाज में परिवर्तन भी दिख रहा है, परंतु इसमें गति लाने के लिए समाज के हर व्यक्ति को लगना होगा। उन्होंने गोष्ठी में उपस्थित प्रमुख जनों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक सत्ता बदलने से हिन्दू समाज का परिवर्तन नहीं होगा। अगर ऐसा होता तो डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार ने राजनीतिक दल की ही स्थापना की होती। संघ की 100 वर्षों की यात्रा में समाज में बहुत बदलाव हुए। समाज ने संघ को स्वीकार किया है। आने वाले समय में और बदलाव दिखेगा। जो लोग पहले जय श्रीराम बोलने से परहेज़ करते थे, वही लोग आज गर्व से बोलते हैं। राम मंदिर का विरोध करने वाले भी अयोध्या में राम मंदिर जा रहे हैं।
युवाओं में बदलाव से संबंधित प्रश्न पर कहा कि आज का ज़ेन-ज़ी भजन मंडली भी चला रहा है। धुरंधर फिल्म भी देख रहा है और थिएटर में भारत माता के जयकारे भी लगा रहा है। इसलिए बदलाव दिख रहा है। गौ-वध पर प्रतिबंध से संबंधित प्रश्न पर कहा कि हिन्दू समाज जब तक जागृत नहीं होगा, कोई भी सरकार कुछ नहीं कर सकती है। हर हिन्दू के जीवन में गाय माता की उपस्थिति होनी चाहिए।
पंच परिवर्तन पर उन्होंने कहा कि इसे अपने जीवन में अपनाने की आवश्यकता है। एक विषय नागरिक कर्तव्य है। झारखंड में अधिकार के लिए तो बहुत आंदोलन हुए, अब कर्तव्य के लिए आंदोलन खड़ा होना चाहिए। हिन्दू समाज की एकता में सबसे बड़ी बाधा जाति है। संघ का एकमात्र लक्ष्य सज्जन शक्ति को एकत्रित करना, ताकि समाज को सही मार्गदर्शन मिल सके। दुर्जन शक्ति को एकत्रित नहीं करना पड़ता, वह स्वयं हो जाती है। उदाहरण के तौर पर जैसे - आतंकवाद, माओवाद, अलगावाद, भाषावाद, जातिवाद, वाले लोगों के पास जब शक्ति आती है तो ये लोग देश तोड़ने में लगाते हैं, जबकि संघ हमेशा ऐसे लोगों एवं संस्थाओं के विरोध में खड़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि चाहे अलगाववाद और आतंकवाद का विषय हो, धारा 370 का विरोध हो, माओवादी हिंसा व अवैध मतांतरण का विरोध हो या चाहे घुसपैठ का विषय हो। संघ हमेशा देश हित में खड़ा रहा। आपातकाल में तो संघ ने पूरी ताकत लगा दी और परिणाम भी दिखा। संघ को राजनीति के नजरिए से नहीं देखें। संघ को नहीं समझने के कारण ही लोगों ने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी माना और प्रतिबंध लगाया। परंतु जब राष्ट्र हित के महत्व का विषय आता है तो संघ हमेशा सामने होता है। राष्ट्र गीत वन्दे मातरम के साथ गोष्ठी का समापन हुआ।



