मेरठ, उत्तर प्रदेश
मेरठ महानगर पश्चिम में जैन विवाह मंडप वेस्टर्न रोड सदर में केशव नगर की चारों बस्ती में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 500 लोगों की सहभागिता रही। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस वर्ष अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस अवसर पर संघ द्वारा पूरे भारतवर्ष की प्रत्येक बस्ती में हिन्दू सम्मेलन आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसी क्रम में आज चारों बस्ती का संयुक्त कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता विनीत कौशल जी का ओजस्वी उद्बोधन रहा। उन्होंने संघ के शताब्दी वर्ष में समाज के लिए विकसित “पंच परिवर्तन” नामक पांच सूत्रों—सामाजिक समरसता, स्व का भाव, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य एवं पर्यावरण संरक्षण—के विषय में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दाती मदन महाराज जी रहे।
मुख्य वक्ता विनीत कौशल जी (विभाग प्रचारक) ने अपने संबोधन में कहा कि भारत माता एवं सनातन धर्म की रक्षा के लिए हम सभी सनातन धर्मियों को सदैव तैयार रहना होगा। कैलाश से लेकर कन्याकुमारी तक आस्था एवं श्रद्धा के केंद्र सशक्त बने रहें, इसके लिए हिन्दू समाज का संगठित होना आवश्यक है। आज पूरी दुनिया भारत की ओर देख रही है और हमारी संस्कृति पर गर्व कर रही है। पंच परिवर्तन के विषय में उन्होंने कहा कि परिवार को एक साथ बैठकर भोजन करना चाहिए, साथ में भ्रमण करना चाहिए, पारंपरिक वेशभूषा का प्रचलन बढ़ाना चाहिए तथा अपने मन के भीतर से गुलामी के भाव को समाप्त करना होगा। स्वदेशी भाव को अपनाकर हमें नए भारत का निर्माण करना है। अपने जीवन में नागरिक कर्तव्यों का पालन करना होगा तथा जल संरक्षण का संकल्प भी लेना होगा, क्योंकि आने वाले समय में पानी को लेकर गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
मुख्य अतिथि दाती मदन महाराज जी ने अपने संबोधन में कहा कि आरएसएस का आधार ही राष्ट्र निर्माण है। इस इसलिए प्रत्येक स्वयंसेवक की रग-रग में भारत माता के लिए त्याग और तपस्या प्रवाहित हो रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को राष्ट्र से प्रेम और समर्पण करना सीखना होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्र प्रेम सभी भावनाओं से श्रेष्ठ है। जिस व्यक्ति को राष्ट्र से प्रेम नहीं होगा, उसे न धर्म से प्रेम होगा और न ही परिवार से। सर्वप्रथम राष्ट्र है—जो राष्ट्र की सेवा और प्रेम करेगा, वही धर्म, समाज और परिवार से भी प्रेम कर सकता है।
दाती महाराज ने अपने जीवन में मुस्कुराने के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को हीन भावना छोड़कर मुस्कुराते रहना चाहिए, क्योंकि मुस्कान से अनेक समस्याओं का समाधान होता है। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति की भूमि, मंगल पांडे की धरती मेरठ में प्रथम आगमन पर वे स्वयं को किसी क्रांतिकारी से कम नहीं समझ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को गौ माता से प्रेम करना चाहिए तथा संकल्प लेना चाहिए कि घर की रसोई में पहली रोटी गाय के लिए तैयार हो। उन्होंने माता-बहनों से आग्रह किया कि बच्चों को कम से कम मोबाइल दें, जिससे आने वाली पीढ़ी में संस्कृति का आदान-प्रदान सही रूप में हो सके। मोबाइल जितना उपयोगी है, उतना ही हमारी संस्कृति के लिए हानिकारक भी है।



