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बिछड़े बंधुओं को स्वधर्म में लाएंगे, सभी को गले लगाएंगे – विहिप अध्यक्ष

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 कालड़ी, केरल

एकता, प्रेम और मानवीय जीवन मूल्यों के साथ अद्वैत वेदांत के प्रणेता आदि शंकराचार्य जी की जयंती पर विश्व हिन्दू परिषद ने एक संकल्प लिया कि गत 1000 वर्षों में किन्हीं कारणों से हिन्दू धर्म से बिछड़े बंधुओं को हम स्वधर्म में लाएंगे। विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने आदि शंकराचार्य जी की, कालड़ी में स्थित पावन जन्मभूमि (कोच्चि – एर्नाकुलम के निकट) पर एकत्र श्रद्धालुओं से कहा कि पूज्य आदि शंकराचार्य जी ने संपूर्ण मानवता और उनके कल्याण के लिए काम किया। वहीं दूसरी ओर विश्व में कुछ लोग आज सिर्फ किसी एक पुस्तक या विचार से बंधकर और बांधकर अपने कट्टरपंथी विचार थोपना चाहते हैं जो मानवता के लिए चुनौती बनता जा रहा है।


“दुनिया के कुछ हिस्सों में, कुछ लोग कट्टरपंथी विचारों को थोपने की कोशिश कर रहे हैं, जो मानवता के लिए एक गंभीर खतरा है। हम दुनिया को ऐसी विनाशकारी विचारधाराओं से बचाने और उन लोगों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो अपने मूल विश्वास से अलग हो गए हैं।”

“हम शंकराचार्य की उस परंपरा का पालन करते हैं, जिनमें इतनी महानता थी कि उन्होंने अत्यंत वंचित पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को भी अपना गुरु स्वीकार कर लिया। हम हिन्दू समाज में आज भी व्याप्त जातिगत भेदभाव की बुराई को पूरी तरह से मिटाने के लिए कृतसंकल्प हैं।”

उन्होंने वहां निकाली गई एक पवित्र धार्मिक यात्रा में भी सहभागिता की। कार्यक्रम में विश्व हिन्दू परिषद के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य पूज्य स्वामी सतस्वरूपानंद जी महाराज, पूज्य स्वामी तीर्थानंद जी महाराज, कोचिंग शिपयार्ड के सेवानिवृत्त अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक डॉ. मधु एस नायर जी, अलुवा जिला संघचालक जस्टिस सुंदरम गोविंद जी तथा पद्मश्री कुंजोल मास जी भी उपस्थित थे।