शामली, उत्तर प्रदेश
आत्मनिर्भर भारत अभियान से प्रेरित होकर ग्रामीण महिलाएं अब खुद के पैरों पर खड़ी होने की प्रेरणा प्रस्तुत कर रही हैं। मेहनत, एकजुटता और आत्मविश्वास के बल पर महिलाएं न केवल अपने परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं, बल्कि गांव की तरक्की में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी हिरणवाड़ा गांव से सामने आई है।
जी हां, हिरणवाड़ा गांव की महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर अपना छोटा उद्योग शुरू किया है। इसमें अहम बात यह है कि इन महिलाओं ने किसी भी सरकारी आर्थिक मदद के बिना, अपनी खुद की पूंजी से यह काम शुरू किया है। स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष बीना ने बताया कि उन्होंने गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर शिव गोरख स्वयं सहायता समूह का गठन किया। सभी महिलाओं ने मिलकर आपसी सहयोग से करीब दो लाख रुपये की राशि इकट्ठा की और अपना व्यवसाय शुरू किया।
समूह की महिलाएं टॉयलेट क्लीनर, फिनाइल, शैंपू, बर्तन धोने का साबुन, फूल झाड़ू, बिना केमिकल वाला नहाने का साबुन और सर्फ जैसे घरेलू उत्पाद खुद तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री के लिए दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर पंजाब नेशनल बैंक के पास एक दुकान किराए पर ली गई है। समूह अध्यक्ष बीना ने बताया कि शुरुआत में बिक्री कम होने के कारण मुनाफा ज्यादा नहीं है, लेकिन सभी महिलाएं पूरी मेहनत और हौसले के साथ आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्पादों के प्रचार-प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बिक्री बढ़ाई जा सके।
वहीं गोसगढ़ गांव की मधु और बबीता भी स्वयं सहायता समूह से जुड़कर दोना-पत्तल बनाने का काम कर रही हैं। इस काम से उन्हें नियमित आय हो रही है और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। स्वयं सहायता समूह के प्रभारी रविंद्र चौधरी ने बताया कि फिलहाल इन समूहों को कोई सरकारी आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि भविष्य में महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा, ताकि उन्हें वित्तीय सहायता और आवश्यक प्रशिक्षण मिल सके।



