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चारधाम यात्रा में महिलाओं के स्वदेशी उत्पादों की धूम, 19 दिन में 22.5 लाख की रिकॉर्ड बिक्री

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चारधाम यात्रा में महिलाओं के स्वदेशी उत्पादों की धूम, 19 दिन में 22.5 लाख की रिकॉर्ड बिक्री

उत्तरकाशी

चारधाम यात्रा इस बार केवल आस्था का केंद्र नहीं बनी है, बल्कि यह महिलाओं की आत्मनिर्भरता और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का भी बड़ा माध्यम बन रही है। स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूह अपने हाथों से तैयार किए गए पारंपरिक उत्पादों के माध्यम से न केवल श्रद्धालुओं का दिल जीत रहे हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहे हैं।


गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर लगाए गए स्वयं सहायता समूहों के स्टालों से जमकर खरीदारी कर रहे हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 19 दिनों में ही इन समूहों ने 22.5 लाख रुपये से अधिक के स्थानीय उत्पादों की रिकॉर्ड बिक्री की है।


इन स्टालों पर महिलाओं द्वारा तैयार यमुना भोग, पहाड़ी दालें, लाल चावल, पिस्यूं लूण, सेब और माल्टे का स्क्वैश, रेडी टू ड्रिंक जूस और पारंपरिक ऊनी कपड़े बिक्री के लिए रखे गए हैं। इसके साथ ही पहली बार यात्रियों के लिए स्वच्छ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने हेतु विशेष भोजनालय भी शुरू किए गए हैं। ग्रामोत्थान परियोजना के जिला परियोजना प्रबंधक कपिल उपाध्याय के अनुसार, स्थानीय महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को श्रद्धालुओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है, जिससे महिलाओं के स्वरोजगार और स्वदेशी अभियान को नई ताकत मिली है।


यह पहल सिद्ध करती है कि जब महिलाओं को अवसर और मंच मिलता है, तो वे अपने कौशल से न केवल परिवार बल्कि पूरे समाज और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई पहचान दे सकती हैं। स्वदेशी उत्पादों को अपनाना  केवल खरीदारी नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, मेहनत और आत्मनिर्भर भारत को समर्थन देने का संदेश भी है।