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उत्तराखंड के सरकारी कार्यालयों में संस्कृत में भी लगेंगी नाम पट्टिकाएं

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उत्तराखंड के सरकारी कार्यालयों में संस्कृत में भी लगेंगी नाम पट्टिकाएं

 

उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने और सरकारी कार्यों में इसके अधिक उपयोग को लेकर सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में अब सरकारी कार्यालयों में संस्कृत भाषा में भी नाम पट्टिकाएं लगाने पर जोर दिया गया है। सा ही विभिन्न विभागों की योजनाओं और विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई।

चमोली में सचिव संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग दीपक कुमार की अध्यक्षता में विभागीय योजनाओं एवं विकास कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, बैठक में सचिव ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि सरकारी कार्यालयों की नाम पट्टिकाएं हिंदी के साथ-साथ संस्कृत भाषा में भी लिखवाई जाएं।

 

उन्होंने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की दूसरी राजभाषा है और इसके संरक्षण संवर्धन के लिए सभी विभागों को सकारात्मक पहल करनी चाहिए, सचिव ने जनगणना कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रथम चरण के अंतर्गत हाउस लिस्टिंग ब्लाक्स (एचएलबी) कार्यों की प्रगति की जानकारी ली तथा अधिकारियों को निर्धारित समय से एक सप्ताह पहले कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए।

 

बैठक में सरकार जनता के द्वार कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई, सचिव ने अधिकारियों को गांवों का भ्रमण करने, रात्रि विश्राम करने और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने को कहा, साथ ही होम स्टे योजना को अधिक प्रभावी बनाने तथा शिकायतों और विकास कार्यों का समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए।

 

वन विभाग को कृषि विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान की रोकथाम और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।

इसके अलावा सचिव ने सिंचाई विभाग, जल संस्थान, जल निगम, स्वास्थ्य विभाग, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं शहरी, पीएमजीएसवाई, लोक निर्माण विभाग तथा ग्रामीण निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

संस्कृत को सरकारी कामकाज और सार्वजनिक जीवन में अधिक स्थान देने की यह पहल केवल भाषा संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है