रामनगर,उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड के
कॉर्बेट क्षेत्र से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जहां ग्रामीण महिलाओं ने अपने कौशल से न केवल रोजगार पाया, बल्कि आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी बनाई है।
बताते चलें कि
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व अपनी जैव विविधता और बाघों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है।
यहां बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने आते हैं। इसी क्षेत्र से सटे तराई पश्चिमी वन
प्रभाग के फाटो जोन में महिलाओं ने एक नई मिसाल पेश की है। जी हां, रामनगर के मालधन क्षेत्र की महिलाओं ने ‘शिव स्वयं सहायता समूह’ बनाकर जूट के बैग
तैयार करना शुरू किया। पिछले तीन सालों से यह महिलाएं जूट बैग बनाकर अपनी आजीविका
चला रही हैं। खास बात यह है कि ये बैग फाटो जोन में आने वाले पर्यटकों के लिए गार्बेज
बैग के रूप में अनिवार्य कर दिए गए हैं। महिलाएं अपने घर के काम पूरे करने के बाद
समय निकालकर ये बैग बनाती हैं। इससे उन्हें नियमित आमदनी हो रही है और वे आर्थिक
रूप से मजबूत बन रही हैं। पहले जो महिलाएं केवल घर तक सीमित थीं, अब वे खुद कमाकर परिवार का सहारा बन रही हैं। फाटो जोन को साल
2021 में इको-टूरिज्म के तहत विकसित किया गया था। 2022 से यहां सफारी के लिए
जिप्सियों का संचालन शुरू हुआ, जिससे पर्यटन बढ़ा और स्थानीय लोगों के
लिए रोजगार के नए अवसर खुले।
इस मॉडल का लाभ महिला समूहों को भी मिला। जूट बैग न केवल रोजगार का साधन बने हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक हैं। प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने में ये बैग बेहतर विकल्प सिद्ध हो रहे हैं। वन विभाग के अनुसार, इस तरह की पहल से स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ी है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। पिछले तीन वर्षों में इस महिला समूह ने करीब 24 लाख रुपये की कमाई की है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। यह पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पलायन जैसी समस्या को भी कम कर रही है। यह प्रयास दिखाता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं, जिससे गांव की अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और प्रकृति के साथ संतुलन भी बना रहता है।



