• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

नौकरी छोड़ खेतों में उतरे युवा, जैविक खेती से बदली किस्मत

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

बरेली, उत्तर प्रदेश

आज के दौर में जहां युवा शहरों की नौकरी के पीछे भागते हैं। वहीं बरेली के संजीव गंगवार ने खेतों को ही अपना स्टार्टअप बना दिया। उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और जैविक खेती का रास्ता चुना। इसके लिए संजीव ने हरियाणा, गुजरात और पंजाब जैसे राज्यों का दौरा किया। किसानों से सीधे प्रशिक्षण लिया और इंटरनेट व डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नई-नई तकनीकें सीखीं। आज संजीव अपने खेत में एक एकड़ में बिना बीज वाला खीरा उगा रहे हैं।  जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। इतना ही नहीं, अब वे अपने फार्म पर ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, रंगीन गोभी और शिमला मिर्च जैसी हाई-वैल्यू फसलें उगाने की तैयारी कर रहे हैं। साथ ही वे औषधीय पौधों पर भी रिसर्च कर रहे हैं जो कम लागत में अच्छा लाभ दे सकते हैं। संजीव केवल खेती नहीं करते बल्कि स्मार्ट फार्मिंग करते हैं।

-मल्टीलेयर फार्मिंग – एक ही जमीन पर अलग-अलग ऊंचाई की फसलें

-ड्रिप इरिगेशन – कम पानी में ज्यादा उत्पादन

-मल्चिंग तकनीक – मिट्टी की नमी बनाए रखना

वे गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत का इस्तेमाल करते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और रसायनों पर खर्च कम होता है। संजीव अब कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से भी जुड़े हैं और दूसरे किसानों को भी आधुनिक खेती के लिए प्रेरित कर रहे हैं। आज उनकी कहानी बरेली के युवाओं और किसानों के लिए एक नई उम्मीद बन गई है। कहते हैं अगर सोच नई हो तो खेत भी बन सकते हैं स्टार्टअप का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म।