चमोली, उत्तराखण्ड
आस्था और श्रद्धा के आगे उम्र कभी बाधा
नहीं बनती। इसका उदाहरण अहमदाबाद से चारधाम यात्रा पर निकला 25 वरिष्ठ श्रद्धालुओं
का दल प्रस्तुत कर रहा है। दल के सभी सदस्य 65
वर्ष से अधिक उम्र के हैं, लेकिन उनके उत्साह और
हौसले में युवाओं जैसी ऊर्जा नजर आ रही है।
जी हां, रविवार सुबह दल कर्णप्रयाग
पहुंचा। यहां श्रद्धालुओं ने अलकनंदा और पिंडर नदियों के संगम पर स्नान किया। इसके
बाद शिवालय में जलाभिषेक किया और मां उमा देवी मंदिर में दर्शन कर आशीर्वाद लिया।
दल के सदस्यों जयकृष्ण पटेल, गोविंद पटेल, कमलेश और विभु भरवाड़
ने बताया कि करीब 19 दिन
पहले अहमदाबाद में चारधाम यात्रा की योजना बनाई गई थी। इसके बाद करीब 1,200 किलोमीटर का सफर तय
कर वे 14 अगस्त
को रेल मार्ग से ऋषिकेश पहुंचे।
ऋषिकेश में गंगा आरती में शामिल होने के
बाद दल ने पैदल यात्रा शुरू की। सभी ने तय किया कि उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में
रखते हुए रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पांच से 10
किलोमीटर ही पैदल चलेंगे। इसी तरह दल ने
नौ दिनों में ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक करीब 160
किलोमीटर की दूरी तय कर ली।
रास्ते में श्रद्धालुओं ने देवप्रयाग
संगम, धारी
देवी मंदिर और रुद्रप्रयाग संगम पर स्नान-ध्यान और दर्शन किए। उनका कहना है कि
यात्रा के दौरान एक-दूसरे का हौसला बढ़ाना ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
श्रद्धालुओं ने बताया कि गुजरात में भी
कई प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हैं, लेकिन उत्तराखण्ड के हिमालयी वातावरण में उन्हें जो शांति और
सुकून मिला, वह
हमेशा याद रहेगा। पहाड़ों की सुंदर वादियां और धार्मिक वातावरण मन को अलग ही आनंद
देते हैं।
दल के सदस्यों ने कहा कि जीवन के इस
पड़ाव पर कब भगवान की शरण में जाना पड़े,
इसका कोई भरोसा नहीं। इसी भावना के साथ
उन्होंने पैदल बदरीनाथ धाम तक जाने का संकल्प लिया है। उनका कहना है कि पुराने समय
में श्रद्धालु पैदल ही बदरीनाथ धाम जाते थे और उनकी यह यात्रा उसी परंपरा को आगे
बढ़ाने का एक छोटा सा प्रयास है।
दल में कुछ श्रद्धालु चौथी बार चारधाम
यात्रा पर निकले हैं, जबकि
कुछ पहली बार इस यात्रा का अनुभव कर रहे हैं। थकान के बीच वे अपने परिवार से फोन
पर बात करते हैं और इंटरनेट मीडिया पर लाइव होकर यात्रा की जानकारी भी साझा करते
हैं।
कर्णप्रयाग से यह उत्साही दल नंदप्रयाग होते हुए अब बदरीनाथ धाम की ओर रवाना हो गया है। उम्र भले ही 65 वर्ष से अधिक हो, लेकिन श्रद्धा, संकल्प और सकारात्मक सोच ने इन यात्रियों के कदमों में आज भी युवाओं जैसा जोश भर रखा है।



