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फार्मेसी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और आर्किटेक्चर की पुस्तकें भारतीय भाषाओं में तैयार करने की पहल स्वागत योग्य

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अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने तकनीकी शिक्षा परिषद के निर्णय का स्वागत किया है. 22 भारतीय भाषाओं में फार्मेसी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और आर्किटेक्चर प्रोग्राम की पाठ्यपुस्तकें तैयार कराने का अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद् का प्रयास अभिनंदन योग्य है. परिषद ने कहा कि भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, संस्कृति एवं संस्कार की वाहक भी हैं. भारतीय भाषाओं में नवीन विषयों से संबंधित ज्ञान के अवसर उपलब्ध होने तथा भाषाई बाधा दूर होने से विशेषतया देश के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों की इन विषयों में नामांकन बढ़ने की संभावनाओं का निश्चित ही विस्तार होगा.

जयपुर राष्ट्रीय अधिवेशन में विस्तृत चर्चा के बाद परिषद का स्पष्ट मत था कि विभिन्न क्षेत्रों के पाठ्यक्रमों की पुस्तकें भारतीय भाषाओं में आनी चाहिए, जिससे भाषाई बाधा के कारण छात्रों के ज्ञानार्जन की समस्याएं दूर हो सकें. ‘स्वभाषा में सम्पूर्ण ज्ञान’ के भाव को इस तरह के कदम से प्रोत्साहन मिलेगा और देश की युवा पीढ़ी अपनी भारतीय परंपराओं में निहित ज्ञान के साथ नवीन विषयों को सहजता के साथ अपनी स्वभाषा में आत्मसात कर सकेगी.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि, “भारतीय भाषाओं में हमारी ज्ञान परंपरा संरक्षित है, हमारी शिक्षा व्यवस्था के आधुनिक मूल्यों को भारतीय परंपरा में निहित मूल्यों के साथ जोड़ा जाना अत्यावश्यक है. भारतीय भाषाओं में आधुनिक पाठ्यक्रमों की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करना स्वागतयोग्य कदम है. परिषद का स्पष्ट मत है कि इन पुस्तकों का अनुवाद पठनीय तथा सरल होना चाहिए, जिससे ज्ञान प्राप्ति में भाषाई जटिलताएं बाधा न बनें.”