बेहतर व्यवस्थाओं से दिव्य और भव्य बनी केदारनाथ यात्रा
- पुनर्निर्माण कार्यों ने बदली केदारपुरी की तस्वीर, चारों धाम में सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंच रहे हैं केदारनाथ धाम
- आपदा से पूर्व पहुंचते थे प्रतिवर्ष चार से पांच लाख श्रद्धालु, अब 20 लाख के आसपास पहुंच रही यह संख्या
16-17 जून 2013 की विनाशकारी केदारनाथ आपदा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। तब चौराबाड़ी ताल के टूटने से आए सैलाब ने केदारपुरी को तबाह कर दिया था और कल्पना करना भी मुश्किल था कि केदारनाथ यात्रा फिर से पुराने स्वरूप में लौट पाएगी। हालांकि, आपदा के 13 वर्ष बाद केदारनाथ ने न सिर्फ स्वयं को संभाला, बल्कि आस्था, पुनर्निर्माण और बेहतर प्रबंधन की बदौलत यात्रा ने नई ऊंचाइयों को छू लिया है।
आपदा से पहले जहां प्रतिवर्ष चार से पांच लाख श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन को पहुंचते थे, वहीं अब यह संख्या 20 लाख के आसपास पहुंच जा रही है। इस वर्ष यात्रा शुरू होने के महज डेढ़ महीने में 12 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा के दर्शन कर चुके हैं, जो यात्रा के प्रति बढ़ते विश्वास एवं बेहतर व्यवस्थाओं का प्रमाण है।
आपदा के बाद 2014 और 2015 में यात्रा प्रभावित रही। सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच सरकार और स्थानीय लोगों ने यात्रा को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास किए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारपुरी में पुनर्निर्माण कार्यों को गति मिली।
केदारपुरी में तीर्थपुरोहितों के लिए 400 से अधिक भवनों का निर्माण कराया गया, जबकि श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक काटेज और आवासीय सुविधाएं विकसित की गईं। आपदा के दौरान रुद्रप्रयाग गौरीकुंड हाईवे कई स्थानों पर बह गया था।
अब इसे आलवेदर रोड परियोजना के तहत पुनर्निर्मित किया गया है। आपदा के बाद भीमबली से केदारनाथ तक करीब 10 किमी लंबा नया पैदल मार्ग तैयार कर उस पर छोटी लिनचोली, लिनचोली और रुद्रा प्वाइंट जैसे नए पड़ाव विकसित किए गए। पूरे पैदल मार्ग को तीन से चार मीटर तक चौड़ा कर सुरक्षा के लिए रेलिंग लगाई गई। विभिन्न पड़ावों पर भोजन, स्वास्थ्य और ठहरने की बेहतर व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गईं।
तीन चरणों में हो रहा पुनर्निर्माण - केदारपुरी में लगभग 700 करोड़ की लागत से पुनर्निर्माण कार्य किए जा रहे हैं।
प्रथम चरण - लगभग 125 करोड़ की परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।
द्वितीय चरण - करीब 200 करोड़ के कार्यों में 95 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
तृतीय चरण - लगभग 225 करोड़ की परियोजनाओं पर कार्य जारी है।
इसके अलावा अन्य आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी करीब 200 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।



