हस्तिनापुर में शिलालेखों और कलाकृतियों से जीवंत, महाभारत काल का इतिहास
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग ने महाभारत कालीन ऐतिहासिक नगरी हस्तिनापुर को धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। अब यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को प्राचीन मंदिरों तथा ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी गाइड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर द्रौपदी मंदिर, पांडव टीला, पांडेश्वर मंदिर और कर्ण मंदिर सहित प्रमुख स्थलों पर विस्तृत शिलालेख, ऐतिहासिक पेंटिंग्स और आकर्षक मूर्तियां स्थापित की जा रही हैं, जिनके माध्यम से हस्तिनापुर का गौरवशाली इतिहास स्वयं पर्यटकों के सामने प्रस्तुत होगा।
पर्यटन विभाग की इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक प्रमुख स्थल पर उससे जुड़ी ऐतिहासिक और पौराणिक जानकारी सरल भाषा में अंकित की गई है, द्रौपदी मंदिर की महंत बेगवती गोस्वामी के अनुसार, मंदिर परिसर में लगाए गए शिलालेखों में द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग, मंदिर की स्थापना और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है, इससे श्रद्धालुओं को महाभारत काल की घटनाओं को समझने में आसानी होगी।
हस्तिनापुर के विभिन्न क्षेत्रों की दीवारों पर महाभारत से जुड़े प्रसंगों को दर्शाती भव्य चित्रकृतियाँ भी बनाई जा रही हैं, इन कलाकृतियों के माध्यम से लगभग 5,000 वर्ष पुराने महाभारत कालीन इतिहास को आकर्षक और जीवंत रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, यह पहल न केवल धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देगी, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ने का कार्य करेगी।
श्रद्धालुओं ने भी इस पहल का स्वागत किया है, मेरठ और बागपत से आए दर्शनार्थियों का कहना है कि पहले ऐतिहासिक स्थलों की जानकारी प्राप्त करना कठिन होता था, लेकिन अब मुख्य प्रवेश द्वार से ही सभी प्रमुख स्थानों का परिचय उपलब्ध होने से भ्रमण अधिक सरल और ज्ञानवर्धक बन गया है।
हस्तिनापुर के भव्य मुख्य द्वार पर निर्मित विशाल रथ, आकर्षक मूर्तियां और विभिन्न स्थानों पर विकसित की जा रही ऐतिहासिक कलाकृतियां इस प्राचीन नगरी को नया स्वरूप प्रदान कर रही हैं, पर्यटन विभाग का यह प्रयास हस्तिनापुर को धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक पर्यटन के एक सशक्त केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



