मेरठ की महिलाएं मूर्ति निर्माण से लिख रहीं आत्मनिर्भरता की नई कहानी
उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद का नगली गांव महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार का प्रेरक उदाहरण बनकर उभर रहा है। यहां की 50 से अधिक महिलाएं मूर्ति निर्माण का प्रशिक्षण लेकर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इस पहल से न केवल महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिल रही है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं बबीता का कहना है कि मूर्ति निर्माण का व्यवसाय कम लागत में शुरू किया जा सकता है और इसकी बाजार में अच्छी मांग है। गांव की कई महिलाओं ने पहले प्रशिक्षण प्राप्त कर समूह के माध्यम से कारोबार शुरू किया था, जिसमें दस से अधिक महिलाएं मिलकर कार्य कर रही हैं और उनका वार्षिक कारोबार लाखों रुपये तक पहुंच चुका है। इसी सफलता से प्रेरित होकर अब गांव की अन्य महिलाएं भी इस प्रशिक्षण से जुड़ रही हैं।
प्रशिक्षणार्थी संजना का कहना है कि घरेलू जिम्मेदारियों के कारण वे नियमित नौकरी नहीं कर सकती थीं, इसलिए उन्होंने इस व्यवसाय को चुना है। घर का काम पूरा करने के बाद वे प्रशिक्षण लेती हैं और अब स्वयं मूर्तियां बनाकर आय भी अर्जित कर रही हैं। उनके अनुसार एक मूर्ति तैयार करने में लगभग 20 मिनट का समय लगता है, जिससे उत्पादन और कमाई दोनों की अच्छी संभावना रहती है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन अक्ष एजुकेशन सोसाइटी द्वारा किया जा रहा है, संस्था के पदाधिकारी दीपक विकल्प के अनुसार, शासन के निर्देशों के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है, प्रशिक्षण के बाद महिलाओं की छह महीने तक नियमित मॉनिटरिंग की जाती है तथा उनके उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है।
सजावटी मूर्तियों की बढ़ती मांग और समूह-आधारित उद्यमिता के कारण नगली गांव की महिलाएं आज आत्मविश्वास के साथ स्वरोजगार की नई मिसाल पेश कर रही हैं, यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और स्थानीय स्तर पर सफल स्टार्टअप संस्कृति विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।



