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सनातन धर्म के मूल्यों को समझ कर आगे बढ़ने की आवश्यकता – भय्याजी जोशी

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मंदसौर, मध्य प्रदेश

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त मंदसौर के कुशाभाऊ ठाकरे प्रेक्षागृह में आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी एवं मातृ शक्ति गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि दुनिया में भारत की परम्पराओं, संस्कृति, समाज और परिवार व्यवस्था का कोई सानी नहीं है, हमें केवल इसके महत्व को समझना होगा। यदि हमने जीवन में दृढ़ता से अपनी मूल परंपराओं का अनुसरण किया, तो हम विश्व के मार्गदर्शक बनने की स्थिति में होंगे। आज सनातन धर्म के मूल्यों को समझ कर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। हम हिन्दू होकर भी हिन्दू नहीं बन पा रहे हैं, हमें स्वयं की भूमिका का निर्धारण करना होगा, तब भारत को विश्व गुरु बनाने का सपना साकार होगा।

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने में जो कुरीतियां बाधक हैं, उन्हें दूर करने का चिंतन समाज को करना चाहिए। हममें हिन्दुत्व का भाव जगे, हम आचरण से भारतीय बनें, यह हमारा प्रयास होना चाहिए। जन्म के आधार पर प्रकृति ने कोई भेदभाव नहीं किया है, तो हम क्यों करें? किसी भी प्रकार का भेदभाव चाहे जातिगत हो या अन्य कोई, दूर किया जाना चाहिए। हिन्दू की सही पहचान जाति से नहीं, उसके जीवन मूल्यों से है।

भय्याजी जोशी ने कहा कि पुरातन काल की कुछ प्रथाएं आज कुरीतियों और विकृति में बदल गई हैं। एक सुदृढ़ राष्ट्र के निर्माण के लिए हमें उन्हें त्यागना होगा, आधुनिकता को स्वीकार करें, उसका सदुपयोग करें, लेकिन पाश्चात्य सभ्यता को जीवन का हिस्सा न बनने दें। उन्होंने उपस्थित प्रमुख जनों से आह्वान किया कि समाज से कुरीतियों को दूर करने की जिम्मेदारी उन्हें संभालनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि देशभक्ति केवल स्वतंत्रता दिवस या गणतंत्र दिवस तक सीमित नहीं है, यह हमारे नित्य जीवन में झलकना चाहिए। हमें सुपर पावर नहीं सुपर राष्ट्र बनना है। भारत ने कभी किसी राष्ट्र पर हमला नहीं किया, सदैव वसुधैव कुटुंबकम की ही बात की है। गोष्ठी में शहर के प्रमुख जन एवं मातृ शक्ति की उपस्थिति रही।