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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: विनिर्माण प्रेरक शक्ति एवं आपूर्ति-श्रृंखला का अद्भुत केंद्र - डॉ. शिवेश प्रताप

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट: विनिर्माण प्रेरक शक्ति एवं आपूर्ति-श्रृंखला का अद्भुत केंद्र - डॉ. शिवेश प्रताप

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन भारत के विमानन और अवसंरचना परिदृश्य में एक ऐतिहासिक छलांग का प्रतीक है, जो इसे एशिया के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड हवाई अड्डों में स्थान दिलाता है। नोएडा में रणनीतिक रूप से स्थित यह हवाई अड्डा क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सशक्त करेगा, इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर दबाव को कम करेगा तथा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स विकास को गति प्रदान करेगा। इसके संचालन से इस क्षेत्र को एक आधुनिक, बहु-माध्यम (मल्टीमॉडल) अर्थव्यवस्था के तहत विनिर्माण, निर्यात और एकीकृत आपूर्ति-श्रृंखलाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित होने की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।

जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, अवसंरचना को नीति रणनीति के केंद्र में रखा गया है। पीएम गति शक्ति, पीएम मित्र पार्क, नेशनल लॉजिस्टिक्स पॉलिसी तथा मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों पर मोदी सरकार का विशेष जोर एक ऐसे समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी को विनिर्माण विकास की रीढ़ माना गया है। इसी परिप्रेक्ष्य में, जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक प्रमुख परियोजना के रूप में उभर रहा है, जो नीतिगत संकल्प को जमीनी क्षमता में परिवर्तित करेगा। इसे एक कार्गाे-केंद्रित, बहु-माध्यमीय प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर स्थित है।

पहले चरण में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को प्रति वर्ष लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों और लगभग 2.49 लाख टन कार्गाे संभालने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसके साथ ही 87 एकड़ का एक समर्पित कार्गाे हब तैयार किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कार्गाे टर्मिनल को सीधे वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों से जोड़ेगा। यह स्थल दादरी में स्थित वेस्टर्न और ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निकट है, साथ ही प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स एवं ट्रांसपोर्ट हब तथा कई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ा हुआ है। एयरपोर्ट के विकास के समानांतर, यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने मेडिकल डिवाइसेस, खिलौने, परिधान, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी (टर्मिनल से लगभग 4 किमी दूर) जैसे क्षेत्र-विशिष्ट औद्योगिक पार्कों की अधिसूचना जारी की है। ये सभी मिलकर ”मेक इन इंडिया“ के तहत विनिर्माण, निर्यात और रोजगार के लिए एक एकीकृत औद्योगिक ढांचा तैयार करते हैं।

1) मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी: लॉजिस्टिक्स बाधाओं में कमी - जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत इसकी कनेक्टिविटी है। दादरी जो इसके पास स्थित है, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (WDFC) का उत्तरी केंद्र है और खुर्जा के माध्यम से ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) से भी जुड़ता है। यह एक उच्च क्षमता वाली डबल-स्टैक रेल नेटवर्क तैयार करता है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को पश्चिम में जेएनपीटी बंदरगाह और पूर्व के प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ता है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स,फार्मास्यूटिकल्स,ऑटोमोबाइल और वस्त्र जैसे समय-संवेदनशील क्षेत्रों के लिए एक मजबूत लॉजिस्टिक्स तंत्र विकसित होता है।

रेल कनेक्टिविटी के अलावा, नेशनल इंडस्ट्रियल अथॉरिटी कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन दादरी में 849 एकड़ का मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब और 360 एकड़ का मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब विकसित कर रहा है, जिसमें ₹4,034 करोड़ से अधिक का निवेश किया जा रहा है। इन परियोजनाओं से लगभग ₹1.15 लाख करोड़ की आर्थिक क्षमता उत्पन्न होने और लगभग 1 लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है। WDFC और EDFC के संगम पर तथा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप के पास स्थित होने के कारण, ये हब आयात और निर्यात दोनों के लिए निर्बाध मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी प्रदान करेंगे।

सड़क कनेक्टिविटी भी उतनी ही मजबूत है। यह एयरपोर्ट सीधे यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ा हुआ है और जेवर-फरीदाबाद लिंक के माध्यम से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा। साथ ही, यह कुंडली- गाजियाबाद- पलवल (KGP) एक्सप्रेसवे और अन्य क्षेत्रीय कॉरिडोर से भी कनेक्ट होगा। भविष्य में मेट्रो और रैपिड रेल कनेक्टिविटी की भी योजना बनाई गई है, जिससे यह एयरपोर्ट एनसीआर के आर्थिक भूगोल के साथ और अधिक एकीकृत हो सकेगा।

निकट अवधि में, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने बस सेवाओं और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म्स के साथ साझेदारी कर पहले और अंतिम मील कनेक्टिविटी की व्यवस्था शुरू कर दी है, जिससे बड़े ट्रांजिट प्रोजेक्ट्स के शुरू होने तक पहुंच संबंधी चुनौतियों को कम किया जा सके। निर्माताओं के लिए यह मल्टीमॉडल नेटवर्क गति, पूर्वानुमान और आपूर्ति-श्रृंखला में फंसी कार्यशील पूंजी को कम करने में सहायक होगा। उच्च मूल्य के निर्यात के लिए एयर कार्गाे, भारी माल और कंटेनर परिवहन के लिए DFC रेल नेटवर्क तथा क्षेत्रीय परिवहन के लिए एक्सप्रेसवे इन सभी के संयोजन से जेवर एयरपोर्ट एक व्यापक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का केंद्रीय स्तंभ बनकर उभरता है।

जेवर एयरपोर्ट के आसपास विकसित यह मल्टीमॉडल एकीकरण केवल एक अवसंरचनात्मक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत की लॉजिस्टिक्स प्रणाली की संरचनात्मक समस्याओं का एक नीतिगत समाधान भी है। डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और मल्टीमॉडल हब से जुड़कर यह परियोजना सरकार के उस लक्ष्य को साकार करती है, जिसके तहत लॉजिस्टिक्स लागत को जीडीपी के 10 प्रतिशत से नीचे लाना है। इससे निर्यातकों को सीधे लाभ मिलेगा। डिलीवरी समय कम होगा, विश्वसनीयता बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक्स, मेडिकल डिवाइसेस तथा टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों को बड़े पैमाने पर विस्तार का अवसर मिलेगा।

और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परियोजना भारतमाला प्रोजेक्ट, सागरमाला प्रोग्राम और पीएम गति शक्ति जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों के समन्वय का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो मिलकर एक एकीकृत लॉजिस्टिक्स ग्रिड तैयार कर रहे हैं। यही समेकित ढांचा भारत की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करेगा और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति देगा।

2) सेक्टर-विशिष्ट पार्कः कनेक्टिविटी को औद्योगिक क्लस्टर में बदलना - यमुना एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी ने जेवर को केवल एक हवाई अड्डा परियोजना के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के केंद्र (न्यूक्लियस) के रूप में परिकल्पित किया है। एयरपोर्ट के आसपास भूमि को सेक्टर-विशिष्ट पार्कों के लिए चिन्हित और आवंटित किया जा रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय कार्गाे गेटवे और दादरी स्थित DFC-आधारित लॉजिस्टिक्स क्षमता का सीधा लाभ उठाते हैं। इस क्लस्टर-आधारित मॉडल से उद्योगों को फैक्ट्री गेट पर ही निर्यात-स्तरीय लॉजिस्टिक्स उपलब्ध होती है, जिससे लागत और समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आती है।

सबसे प्रमुख परियोजनाओं में सेक्टर-28 का लगभग 350 एकड़ में फैला मेडिकल डिवाइसेस पार्क है, जिसमें गामा रेडिएशन स्टरलाइजेशन जैसी उन्नत सुविधाएं शामिल हैं। यह देश में डिस्पोजेबल्स, इम्प्लांट्स, डायग्नोस्टिक्स और चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगा। इसके निकट ही सेक्टर-10 में सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित किया जा रहा है, जिसे 2025 में HCL–Foxconn परियोजना की मंजूरी से नई गति मिली। यह संयंत्र प्रति माह 3.6 करोड़ डिस्प्ले ड्राइवर ICs का उत्पादन करेगा और लगभग 2,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करेगा, साथ ही एक व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन को विकसित करेगा।

श्रम-प्रधान उद्योगों को समर्थन देने के लिए सेक्टर-33 में टॉय पार्क विकसित किया गया है, जहां 130-140 प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं और 100 से अधिक इकाइयों को कब्जा दिया जा चुका है। उत्पादन शुरू होने पर यह पार्क हजारों रोजगार सृजित करेगा। इसके समानांतर, सेक्टर-29 में अपैरल, MSME और हस्तशिल्प पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जो फैशन निर्यात के लिए एयर कार्गाे और घरेलू वितरण के लिए DFC रेल नेटवर्क का उपयोग करेंगे।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए सेक्टर-28 में डेटा सेंटर पार्क विकसित किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व Yotta Infrastructure कर रही है। यहां 30,000 रैक और 160-250 मेगावाट IT पावर क्षमता वाला हाइपरस्केल डेटा सेंटर प्रस्तावित है, जो AI, क्लाउड और डिजाइन आधारित उद्योगों को शक्ति प्रदान करेगा। वहीं सेक्टर-21 में लगभग 1,000 एकड़ में अंतरराष्ट्रीय फिल्म सिटी विकसित की जा रही है, जो एयरपोर्ट से मात्र 4 किमी दूरी पर होगी और AVGC (Animation, VFX, Gaming, Comics) जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देगी।

ये सभी सेक्टर पार्क मिलकर मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर कार्यक्रम के लक्ष्यों को साकार करते हैं। ये भारत के विनिर्माण क्षेत्र की पुरानी चुनौतियों की कमी, कमजोर सप्लाई चेन लिंक और वैश्विक बाजार तक सीमित पहुंच को दूर करते हैं और बड़े पैमाने पर प्रतिस्पर्धी उत्पादन को संभव बनाते हैं।

3) तैयार इलेक्ट्रॉनिक्स आधार: मेक इन इंडिया को नई गति: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ऐसे क्षेत्र में विकसित हो रहा है, जो पहले से ही भारत के सबसे मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण केंद्रों में से एक है। उत्तर प्रदेश देश के लगभग 55 प्रतिशत मोबाइल उत्पादन और करीब 15 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में योगदान देता है।

इस पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत करते हुए, सैमसंग का ग्रेटर नोएडा प्लांट अब लैपटॉप उत्पादन भी कर रहा है, जिससे भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में विविधता आ रही है। जैसे ही जेवर एयरपोर्ट पूर्ण रूप से चालू होगा और दादरी के DFC नेटवर्क से जुड़ेगा, निर्यात-उन्मुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी। इससे ऑर्डर से डिलीवरी तक का समय काफी कम होगा और भारत उच्च मूल्य श्रृंखला में ऊपर बढ़ सकेगा।

4) सप्लाई-चेन ”मार्वल“: कैसे जुड़ते हैं सभी घटक- जेवर पारिस्थितिकी तंत्र की सबसे बड़ी ताकत इसकी समेकित संरचना है, जहां सभी घटक एक निर्बाध सप्लाई चेन में जुड़ते हैं। एयरपोर्ट का कार्गाे हब वेयरहाउसिंग से सीधे जुड़ा है, जिससे परिवहन में समय की बचत होती है और उत्पाद तेजी से बाजार तक पहुंचते हैं। दादरी स्थित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के साथ मिलकर यह प्रणाली उद्योगों को सबसे उपयुक्त माध्यम हवाई या रेल का चयन करने की सुविधा देती है।

क्लस्टर-आधारित विकास उत्पादकता को भी बढ़ाता है। सेक्टर-विशिष्ट पार्कों में परीक्षण केंद्र, डिजाइन लैब, टूल रूम और लॉजिस्टिक्स सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं, जिससे ”जस्ट-इन-टाइम“ उत्पादन और नए उत्पादों की तेजी से लॉन्चिंग संभव होती है। मेडिकल डिवाइसेस, सेमीकंडक्टर, खिलौने, वस्त्र और डेटा सेंटर ये सभी एक-दूसरे को सपोर्ट करते हुए एक एकीकृत वैल्यू चेन बनाते हैं।

यह पूरा ढांचा मेक इन इंडिया, इंडिया सेमिकंडक्टर मिशन और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीतियों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। निवेश के संकेत पहले ही स्पष्ट हैं, जैसे HCL–Foxconn परियोजना और YEIDA द्वारा लगातार प्लॉट आवंटन।

रोजगार के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। दादरी मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब से ही लगभग 1 लाख प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होने की संभावना है, जबकि सेमीकंडक्टर इकाई लगभग 2,000 और टॉय पार्क हजारों नौकरियां सृजित करेगा।

अंततः, जेवर केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि एक संपूर्ण लॉजिस्टिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम है, जो फ्रेट कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और औद्योगिक पार्कों के साथ एकीकृत है। यह वही मॉडल है जो ”मेक इन इंडिया“ को वास्तविक निर्यात, निवेश और रोजगार में परिवर्तित करता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जेवर भारत को केवल असेंबली बेस से आगे बढ़ाकर एक सशक्त वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने की क्षमता रखता है, जहां प्रतिस्पर्धात्मकता केवल लक्ष्य नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की संरचना में निहित है।


लेखक - डॉ. शिवेश प्रताप, संयोजक, विजन विकसित भारत नीति एवं अनुसंधान