रुड़की, उत्तराखण्ड
-IIT रुड़की ने बनाया ड्रोन
-जंगलों की आग रोकने में सहायक होगा ड्रोन
भारतीय
प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने एक बड़ी उपलब्धि प्राप्त की है। जी हां, संस्थान के वैज्ञानिकों ने ऐसा ड्रोन विकसित किया है, जिसकी मदद से कम लागत में कृत्रिम बारिश और बर्फबारी कराई जा सकेगी। यह तकनीक
खेती, जल संरक्षण और जंगलों की सुरक्षा के लिए बेहद उपयोगी साबित
हो सकती है। जानकारी के अनुसार,
आईआईटी रुड़की के
भू-विज्ञान विभाग के प्रोफेसर एस. मौर्य ने बताया कि यह ड्रोन लगभग 11 किलो वजन का
है और जमीन से करीब चार किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसका प्रयोग
क्लाउड सीडिंग यानी बादलों में खास पदार्थ छोड़कर बारिश कराने के लिए किया जाएगा।
इससे सूखे की स्थिति, गिरते भूजल स्तर और असमान वर्षा जैसी समस्याओं
से निपटने में मदद मिलेगी।
प्रो. मौर्य के अनुसार भारत में कई जगहों पर कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो जाती है, जबकि कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती। इसका असर खेती, पीने के पानी और बिजली उत्पादन पर पड़ता है। क्लाउड सीडिंग का उद्देश्य बादलों में मौजूद नमी का बेहतर उपयोग कर सही समय और सही जगह पर बारिश कराना है। वही यह ड्रोन पहाड़ी इलाकों में कृत्रिम बारिश और बर्फबारी कराने के साथ-साथ जंगलों में मिट्टी की नमी बढ़ाने में भी मदद करेगा। बारिश की कमी के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे में यह तकनीक आग की घटनाओं को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो सकती है।



