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सूखा तालाब, जो अब बना जीवन का स्रोत

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मथुरा, उत्तर प्रदेश

जहां मजबूत इच्छाशक्ति और समाज के लिए कुछ करने की हिम्मत होती है, वहां बदलाव को कोई नहीं रोक सकता। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण मथुरा के अभयपुरा गांव में देखने को मिला है, जहां सुभाष चौधरी ने अपने प्रयासों से वर्षों से सूखे पड़े तालाब को फिर से जीवन दे दिया। जानकारी के अनुसार अभयपुरा गांव का एक तालाब करीब 60 वर्षों से सूखा पड़ा था। कभी यह तालाब गांव की खेती, पर्यावरण और संस्कृति का अहम हिस्सा हुआ करता था, लेकिन समय के साथ यह विलुप्त सा हो गया। सुभाष चौधरी ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। फावड़ा उठाकर उन्होंने खुद नाले की खुदाई शुरू की और गांव के लोगों को भी साथ जोड़ा। उनका यह प्रयास पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन गया।

जब सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारियों ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि तालाब कागजों में दर्ज नहीं है, तब भी सुभाष चौधरी पीछे नहीं हटे। उन्होंने दिन-रात मेहनत की, करीब एक किलोमीटर दूर से नाली खुदवाकर और पाइप डलवाकर पानी तालाब तक पहुंचाया। इस दौरान गांव के बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया। पूर्व अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र फोगाट, अधिशासी अभियंता त्रिलोक चंद लाम्बा और सिंचाई विभाग की टीम ने तकनीकी सहयोग देकर इस कार्य को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। अवैध कब्जों और माफियाओं के खिलाफ भी मिलकर कार्रवाई की गई।

आज यह तालाब केवल पानी का स्रोत ही नहीं है, बल्कि पशु पक्षियों, किसानों और भूजल स्तर के लिए जीवनरेखा बन गया है। गांव की पेयजल समस्या काफी हद तक दूर हुई है और सिंचाई भी आसान हो गई है। अगर लक्ष्य मजबूत हो और समाज साथ दे, तो गांव की तस्वीर बदली जा सकती है। सुभाष चौधरी का कहना है, “यह तालाब केवल पानी का स्रोत नहीं, हमारी विरासत है। इसे बचाना हमारा कर्तव्य था। समाज और अधिकारियों के सहयोग से आज यह सपना सच हुआ है। जब तक जल है, तब तक कल है।