बदायूं, उत्तर प्रदेश
आगे बैठक में
संरक्षक नंदकिशोर ने बताया कि बदायूं प्राचीन काल में संतों की पवित्र भूमि रहा
है। यहां स्थापित गुरुकुलों में दूर-दराज से छात्र आकर सनातन धर्म और वेदों की
शिक्षा प्राप्त करते थे। संगठन अध्यक्ष जितेंद्र कुमार साहू ने कहा कि जनपद के
राजा महिपाल के शासनकाल में इस क्षेत्र का नाम ‘वेदामऊ’ था, जो मुगलों के आक्रमण के बाद बदायूं कहलाने लगा।
संगठन महासचिव
अश्वनी भारद्वाज ने जनपद की पुरानी सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को पुनर्जीवित
करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बदायूं का नाम पुनः उसके प्राचीन नाम ‘वेदामऊ’ किए जाने का प्रस्ताव रखा। बैठक के मुख्य अतिथि
सूर्यदेव वर्मा ने क्षेत्र में नए गुरुकुलों की स्थापना के लिए शासन को प्रस्ताव
और मांग पत्र भेजने का सुझाव दिया।
इस अवसर पर कार्य
अध्यक्ष डॉ. सुशील गुप्ता सहित दिनेश चंद्र वर्मा, चंद्रदेव वर्मा, आकाश साहू, आकाश प्रजापति, राजकुमार सेनगर, यशवर्धन सक्सेना, राजीव रायजादे, नरेंद्र गुप्ता, राकेश साहू, डॉ. अमर सिंह और शेखर साहू उपस्थित रहे।



