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उत्तराखण्ड की संस्कृति को संजोने का प्रयास, बिना शराब की शादी पर सम्मान

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दोईवाला, उत्तराखण्ड

उत्तराखण्ड अपनी समृद्ध संस्कृति, सरल जीवनशैली और सामाजिक मूल्यों के लिए जाना जाता है। यहां के रीति-रिवाज हमेशा से सादगी, सहयोग और पारिवारिक एकता के प्रतीक रहे हैं। इसी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने और आने वाली पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए गड़ूल ग्राम पंचायत में एक प्रेरणादायक पहल की गई है।

उत्तराखण्ड में शादियों और पारिवारिक आयोजनों को परंपरागत रूप से सादगी और संस्कारों के साथ मनाया जाता रहा है। हाल के समय में कॉकटेल पार्टी का चलन बढ़ा है, लेकिन गड़ूल ग्राम पंचायत ने अपनी सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्राम प्रधान स्वीटी रावत ने निर्णय लिया है कि जो परिवार शादी में शराब नहीं परोसेगा, उसे 51 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।

इस पहल का उद्देश्य किसी पर रोक लगाना नहीं, बल्कि समाज को अपनी संस्कृति, संस्कार और स्वस्थ परंपराओं की ओर प्रेरित करना है। ग्राम प्रधान का मानना है कि बिना शराब के भी शादियां खुशी, सम्मान और आपसी प्रेम के साथ मनाई जा सकती हैं। इससे न केवल पैसे की बचत होती है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी सकारात्मक संदेश मिलता है। वहीं अब तक दो परिवार इस पहल से लाभान्वित हो चुके हैं। गांव के निवासी ज्ञान सिंह बिष्ट ने अपनी बेटी की शादी में शराब न परोसकर इस मुहिम की शुरुआत की। उनके इस कदम को सम्मान देते हुए देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने उन्हें 51 हजार रुपये का चेक देकर प्रोत्साहित किया।


इस पहल को लेकर ग्राम प्रधान के पति धर्मेंद्र रावत का कहना है कि इस तरह के प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव आता है। शादियों में सादगी अपनाने से हमारी सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है और युवा पीढ़ी को सही संस्कार मिलते हैं। उन्होंने बताया कि इस सोच को प्रशासन और समाज दोनों का समर्थन मिल रहा है। गड़ूल ग्राम पंचायत की यह पहल सिद्ध करती है कि अगर सोच सकारात्मक हो, तो परंपराओं को निभाते हुए भी समाज में बदलाव लाया जा सकता है। यह मुहिम उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संजोने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।