ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश
इंजीनियर से
पर्यावरण रक्षक तक
उत्तर प्रदेश के
गौतम बुद्ध नगर जिले के डढा गांव में जन्मे रामवीर तंवर ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग
की पढ़ाई की और कुछ समय तक नौकरी भी की। लेकिन अपने बचपन के तालाबों को नष्ट होते
देखकर उन्होंने पर्यावरण के लिए काम करने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने ‘से अर्थ’ नाम से एक एनजीओ की शुरुआत की, जो जल संरक्षण और तालाबों की सफाई पर काम करता है।
तालाबों की सफाई
और चुनौतियां
आज रामवीर और उनकी टीम उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, दिल्ली, गुजरात और कर्नाटक जैसे राज्यों में करीब 80 तालाबों को नया जीवन दे चुकी है। सफाई के दौरान उन्हें गंदगी, प्लास्टिक कचरा, मरे हुए जानवर और कई बार सांप-बिच्छुओं जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तालाबों की सफाई के साथ-साथ पानी की गुणवत्ता सुधारना और आसपास हरियाली बढ़ाना भी उनके काम का हिस्सा है।
जागरूकता और
लोगों की भागीदारी
रामवीर का मानना है कि अकेले सफाई करने से बदलाव नहीं आएगा, इसके लिए लोगों को जागरूक होना जरूरी है। इसी सोच के तहत उन्होंने “सेल्फी विद पॉन्ड” जैसी मुहिम शुरू की, जिससे लोग साफ किए गए तालाबों के साथ तस्वीरें साझा करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। इससे स्थानीय लोग और प्रशासन भी तालाबों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार बने।
सम्मान और पहचान
रामवीर तंवर के काम को देश और विदेश दोनों जगह सराहा गया है। प्रधानमंत्री सहित कई बड़े नेताओं और संस्थाओं ने उनके प्रयासों की प्रशंसा की है। सम्मान और पुरस्कार मिलने के बाद उनके साथ जुड़ने वाले लोगों और संस्थाओं की संख्या भी बढ़ी है।
आगे की सोच
रामवीर तंवर कहते
हैं कि तालाबों की सफाई केवल शुरुआत है। उनका सपना है कि गांवों और शहरों में जल
संरक्षण की सही समझ विकसित हो, भूजल स्तर सुधरे
और आने वाली पीढ़ियों को साफ पानी और स्वस्थ पर्यावरण मिल सके। उनकी कहानी यह सिद्ध
करती है कि अगर लक्ष्य मजबूत हो, तो एक आम इंसान
भी समाज और पर्यावरण में बड़ा बदलाव ला सकता है।



