पर्यावरण: एक अत्यावश्यक प्रकरण
पर्यावरण दो शब्दों के मेल का भान कराता है परि और आवरण जिसमें हम अपने आसपास के लोगों व चीजों से लिपटे हुए है इसमें जल, वायु, भूमि, पेड़ पौधे तथा मानव निर्मित संसाधन सड़कों, घर, बिल्डिंग इन सबसे घिरा जीवित प्राणी, जो सजीव और निर्जीव वस्तुओं के समुह के बीच संतुलन लाने की जद्दोजहद करता हुआ।
पर इस का कारण मनुष्य स्वयं भी है। पर्यावरण में प्रकृति ने हमें भूमि, पेड़ पौधे प्रदान किए। जो स्वच्छ वायु मंडल का निर्माण कर मनुष्य के जैविक कार्यों में सहयोग करते हैं। पर मनुष्य ने अजैविक घटकों का निर्माण किया। अपने रहन-सहन के स्तर में सुधार लाने के लिए वह ऊंची ऊंची बिल्डिंगों का निर्माण करता था, रहा है। जिससे सारी नैसर्गिकता समाप्त होती जा रही है और भरी धरती की जगह कंक्रीट के जंगल जगह लेते जा रहें हैं और पर्यावरण दूषित होता जा है। साथ ही जलवायु परिवर्तन भी एक घटक है पर्यावरण को दूषित करने का।
मनुष्य अपनी जनसंख्या में वृद्धि इतनी तेजी से करता रहा है कि उसे जीवन यापन के लिए कृत्रिम संसाधनों की आवश्यकता पड़ रही है। उसके द्वारा बनाए गए घर, रहने के लिए मिली भूमि वातावरण पर भारी पड़ रही है। धूल मिट्टी के गुबार उठ-उठ कर वातावरण को धूमिल कर रहे हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं, बारिश, सूखा, मौसमी जलवायु परिवर्तन भी पर्यावरण को प्रभावित करते हैं। मनुष्य का अवांछनीय तत्वों में संसाधनों का दोहन पैट्रोलियम पदार्थों और खनिज पदार्थों का अत्यधिक दोहन करना पर्यावरण को प्रभावित कर रहा है।
इस सबके लिए पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता है। जिसके लिए धरती को हरा-भरा बनाए रखा जाए। पृथ्वी पर हरीतिमा लाने के लिए धरती पर पेड़ पौधे लगाए जाएं। वनों की कटाई को रोका जाए। जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्या उत्पन्न न हो। आज मनुष्य भौतिक साधनों के पीछे दौड़ रहा है और अनैच्छिक वातावरण तैयार करता जा रहा है पर पर्यावरण को संरक्षित करने का जिम्मा भी मनुष्य का ही है जिससे वह अपने आसपास नैसर्गिकता लाए व अपने द्वारा ओढ़े गये आवरण को स्वच्छ पर्यावरण का जामा पहना सके।
कारखानों से निकलने वाला धुआं, जहरीली गैस, ज्वलनशील पदार्थ वायु को जहरीला बनाते हैं। आजकल सबके पास गाड़ियां हैं और गाड़ियों से निकलने वाला धुआं हमारी आंखों पर असर डालता है। व वायु को खराब करता है। नदियों झीलों में कूड़ा व रसायनिक पदार्थों का रिसाव जल प्रदूषण बढ़ता है। यह पानी में रहने वाले जीवों को तो नुकसान पहुंचाता ही है, साथ ही पीने के पानी को भी दूषित करता है। जिससे कयी बिमारियां हो रही है इसके अलावा रसायनिक पदार्थ के डालने से भूमि की उर्वरता को नुकसान पहुंच रहा है। पेड़ पौधों को हानि हो रही है।
गाड़ियों की आवाजाही से कोलाहल बढ़ रहा है जिससे शोर उत्पन्न होने से ध्वनि प्रदूषण फैल रहा है। इन सबके लिए पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए रसायनिक पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। कूड़े की उचित व्यवस्था हो, वातावरण को स्वच्छ रखने का उचित प्रयास किए जाने चाहिए। भूमि की उर्वरा क्षमता बढ़ाने के लिए पेड पौधों की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इसके लिए अपनी जीवनशैली में बदलाव लाकर मनुष्यों में जागरूकता पैदा करनी होगी जिससे पर्यावरण को बल मिले। और स्वस्थ पर्यावरण मिल सके।




