रायपुर, छत्तीसगढ़
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त छत्तीसगढ़ के रायपुर अंतर्गत अभनपुर के सोनपैरी स्थित असंग देव कबीर आश्रम में विशाल हिन्दू सम्मेलन आयोजित किया गया।
हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी, मुख्य अतिथि पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री असंग देव जी एवं विशिष्ट अतिथि गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम जी की गरिमामयी उपस्थिति रही।
सरसंघचालक जी ने कहा कि संघ के सौ वर्ष पूर्ण होने पर देशभर में हिन्दू सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं। संघ स्थापना का शताब्दी वर्ष उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज कार्य को गति देने का अवसर है। इस अवसर पर स्वयंसेवक पंच परिवर्तन का विषय लेकर समाज में जा रहे हैं। हम सिर्फ संकट की चर्चा नहीं करते हैं, बल्कि उपाय पर भी बात करते हैं, क्योंकि यदि हम ठीक रहेंगे तो किसी संकट का असर नहीं होगा। उन्होंने प्रेरक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा, एक खरगोश सोया था, अचानक पत्ता गिरा तो वह डर गया। उसने भगवान से माँगा, भगवान मुझे छोटा क्यों बनाया, कुछ हाथी जैसा बना देते। भगवान ने उसे तथास्तु कह दिया। अब वह तालाब में नहाने गया, तो वहाँ मेढकों ने कहा, वहाँ मगरमच्छ हैं मत जाओ, खरगोश ने कहा हे भगवान मगरमच्छ जैसी मोटी खाल दे देते, भगवान ने कहा तथास्तु, अगले दिन वन में वह कहीं जा रहा था, तो जानवरों ने कहा, भागो जंगली भैंसों का झुण्ड आ रहा है, कोई मोटी खाल काम नहीं आएगी। इस पर खरगोश ने पुनः भगवान को याद किया। भगवान ने कहा, अलग-अलग रूप क्षमता मांगने के बजाय, भय समाप्त करने का ही वरदान मांग लेते।
मोहन भागवत जी ने कहा कि पांच बातें व्यवहार में लानी पहला, आपसी भेद को समाप्त करना होगा। समाज के हर वर्ग में हमारा उठना-बैठना और सुख-दुःख में सहभागिता हो। सबको मैं अपना मित्र बनाऊंगा, यही सामाजिक समरसता है। पानी का साधन जो भी हो, वह सबके लिए हो।
दूसरा, अपने घर में सप्ताह में एक दिन तय करके सब एक साथ भजन करें, साथ में घर पर बना भोजन करें और आपस के सुख-दुःख की चर्चा करें। हम कौन हैं और देश की स्थिति-परिस्थिति पर चर्चा करें। महान आदर्शों पर चर्चा करना और उन्हें जीवन में कैसे अपनाएं, इस पर चर्चा कर प्रेरित करना।
तीसरा, आज ग्लोबल वार्मिंग की चुनौती है, पर्यावरण संरक्षण के लिए मैं व्यक्तिगत स्तर पर क्या कर सकता हूँ? सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कैसे कम हो सकताहै? पेड़ लगाओ, वाटर हार्वेस्टिंग कर सकते हैं।
चौथा, स्व के मार्ग पर चलना, घर परिवार और समाज में स्वभाषा बोलूंगा। यदि दूसरे प्रान्त में रहता हूँ तो वहाँ की भाषा भी सीख लूंगा। अपना वेश पहनना, हर दिन नहीं पहन सकता, लेकिन पूजा में तो पहन सकता हूँ। अपनी वेशभूषा पहनना ही नहीं आता, यह ठीक नहीं। स्वदेशी वस्तु का उपयोग अधिक करेंगे।
पांचवा, धर्म सम्मत आचरण कैसे करें? इसके लिए नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। संविधान हमारे पुरखों ने हमें प्रदान किया है, उसमें हमारे मूल्य व संस्कृति के दर्शन की अभिव्यक्ति होती है। उनका पालन करना चाहिए। कुछ बातें कानून में नहीं हैं, माता-पिता बड़ों के चरण स्पर्श करना, इससे विनम्रता आती है। बच्चों को संस्कार दें, घर में बच्चों से दान दिलवाने की परंपरा रही है, जिससे उनमें दायित्व का बोध आए।
संघ शताब्दी वर्ष में स्वयंसेवक यही पाँच बातें लेकर समाज में जा रहे हैं, स्वयंसेवकों ने इन विषयों को पहले स्वयं भी अपनाया है, इन पाँच बातों, पंच परिवर्तन को अपना कर हम राष्ट्र व समाज की उन्नति में सहभागी हो सकते हैं।
मुख्य अतिथि पूज्य गुरुदेव राष्ट्रीय संत श्री असंग देव जी ने अपने आशीर्वचन में कहा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हमें और आपको स्वयं सेवा करना सिखाता है। मधुमक्खी में संगठन होता है तो हाथी भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। आपका धन खो जाए पुनः मिल जाएगा, मित्र पुनः वापस आ जाएंगे, लेकिन एक बार मनुष्य का शरीर व्यर्थ में छूट जाए तो उसके पुण्य को पुनः अर्जित नहीं किया जा सकता। देवताओं से भी श्रेष्ठ मनुष्य का जीवन होता है, लेकिन उसके लिए संस्कार आवश्यक हैं, बिना संस्कार मनुष्य दानव बन जाता है।
उन्होंने कहा, हिन्दू धर्म सभी पंथों की जड़ है, यह हमारा सौभाग्य है कि भारत जैसी पुण्य भूमि में जन्म मिला जहाँ भगवान राम एवं भगवान कृष्ण का जन्म हुआ। आज बांग्लादेश सहित विश्व में जिस प्रकार चुनौती है, ऐसे में बंटने का नहीं संगठित होने का समय है। देश में जब भी कोई आपदा आए तो सबसे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का स्वयंसेवक खड़ा मिलेगा, वह बिना प्रचार के कार्य करता है।
हिन्दू सम्मेलन को संबोधित करते हुए गायत्री परिवार की समाजसेवी उर्मिला नेताम जी ने कहा, आज समाज को संगठन की सर्वाधिक आवश्यकता है। आज परिवार बिखर रहे हैं, संस्कार देकर भारतीय संस्कृति को बचाया जा सकता है। आज विदेशी संस्कृति के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे में मातृशक्ति के जागरण की सबसे अधिक आवश्यकता है।
हिन्दू सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ी लोक कलाकार और गायिका आरु साहू और उनकी टीम ने भजन एवं लोकगीत की सुंदर प्रस्तुति दी। उनके भजन से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया।
हिन्दू सम्मेलन के पश्चात सरसंघचालक जी ने सोनपैरी गांव में कोविदार पौधा लगाकर लोगों को पर्यावरण के प्रति दायित्व का संदेश दिया।



