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बच्चों की छुट्टियां कैसे दिलचस्प बनाएं - पूनम भटनागर

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बच्चों की छुट्टियां कैसे दिलचस्प बनाएं -  पूनम भटनागर, लेखिका


छुट्टियां चीज ही ऐसी हैं कि नाम सुनते ही सभी उत्साहित हो जाते हैं, पर बच्चे समय से कोई काम कर ही नहीं पाते और अपना दिमाग बेकार के विषयों में लगा देते हैं पर ये क्या नमिता जी के यहां तो छुट्टियों के पहले दिन ही युद्ध का माहौल छाया हुआ है। सोनल और राजू तो हाथापाई पर उतर आए। नमिता जी बार बार बीच बचाव करके जाती, पर थोड़ी ही देर में स्थिति वैसी ही बन जाती।


अब के बारे भी वह रसोई का काम छोड़कर हांफते हुए आईं और दोनों की कथा सुनने लगीं और दोनों को इंस्ट्रक्शन दिया पर ये क्या इस सब में रसोई में गैस पर चढ़ाई सब्जी जलने की खुशबू आईं, तो वह किचन की तरफ भागी, पर उनके जाते ही फिर बहस शुरू हो गई। खैर उस समय तो किसी तरह बिता कर उन्होंने बच्चों को शांत किया पर वह सोचने लगी कि सारी छुट्टियां तो वह इस माहौल को घर में बना कर नहीं रख सकतीं। तभी उन्होंने अपनी सहेली रोशनी को फोन किया और उसके साथ अपनी प्रोब्लम बताई तो रोशनी ने उन्हें बच्चों के छुट्टियां बिताने के कई टिप्स दिए जो हम आपके साथ साझा करते हैं।

पहले तो यह देखिए आपका बच्चा किसी आयु, वर्ग में आता है, फिर यदि वह  3-5 वर्ष में आता है तो उसके साथ आपको मेहनत करनी होगी। उसे अपना थोड़ा समय दीजिए।उसे शिष्टाचार सूचक शब्दों से अवगत कराएं। धन्यवाद, सौरी गलती करने पर उसे मानना। इसके अलावा उनके स्वास्थ्य संबंधी आदत का विकास करने वाली बातें बताना।

1.बच्चों को साफ सुथरा रहने के लिए सिखाया जाये। इसके लिए उन्हें रोज दांत साफ करना बताएं। रोज नहाने के लिए उन्हें कहानी सुनाएं कि हवा में धूल के कण होते हैं, जिनमें जर्म होते हैं यदि, हम अपने शरीर को साफ नहीं रखेंगे, तो बिमारियां घेर लेंगी और इसके लिए रोज स्नान आवश्यक है। अपने हाथों को स्वच्छ रखें।

ये तो हुई गुणात्मक बातें, इसके अलावा उन्हें प्राकृतिक जानवरों व पशु पक्षियों की कहानियों से अवगत कराया जाना चाहिए। खेल खिलौने से मिलकर कैसे खेला जाए, यह बताएं। कलर्स की, काउंटिंग, अक्षर ज्ञान खेल खेल में ही उन्हें आ जाए तो इससे अच्छी क्या बात है। स्वयं भोजन करने को उन्हें प्रेरित करें।

2. 6-12 वर्ष की आयु वर्ग के लिए। इसमें थोड़े बड़ी आयु के बच्चे आ जाते हैं, वैसे तो इस आयु में बच्चे थोड़े समझदार हो जाते हैं पर फिर भी कहते हैं न कि जहां दो बच्चे साथ बैठे तो लड़ना झगड़ना तो संभव ही है, तो इसके लिए क्यों न छुट्टियों के इस माहौल में इन्हें खेल खेल में ही कुछ शिक्षाप्रद सिखा दें इस आयु वर्ग के बच्चों को हम थोड़े बड़े काम करने के लिए दे सकते हैं जैसे इन्हें टाइम की वैल्यू समझाएं। दिन के समय को किस तरह व्यतीत करना है, यह जानकारी रखें। किस तरह टाइम खेल के साथ कुछ किरियेटिव करने में लगाना है, यह जानें। कुकिंग में शौक है तो सैंडविच, ब्रेड स्लाइस, सलाद आदि बनाना सीख सकते हैं। अपना बिस्तर बनाना, व तय करके रखना। अपने कपड़े तय करना, जूते पोलिश करना। 

स्वच्छता में अपने कमरे को स्वच्छ रखना। इस उम्र से पैसे की समझ भी आने लगती है पैसे गुल्लक में जमा करना। उन्हें किस तरह व कितना खर्च करना है ये जानना। पालतू जानवर को खाना देना। और उनकी देखभाल करना। गमलों में पौधे लगाना और उनकी देखभाल करना। तार्किक क्षमता बढ़ाने के लिए पजल और पहेलियां सुलझाना। दोस्तों के साथ कठपुतली, व नाटकों का आयोजन करना। इसके अलावा म्यूजिक व डांस सीखना।

3. इससे बड़ी उम्र के बच्चों के लिए इंस्टीट्यूट खुले हुए हैं व उनमें जाकर स्पोर्ट्स की, म्यूजिक की, इंस्ट्रुमेंट बजाने की या कोई परिक्षा की तैयारी की बाकायदा ट्रेनिंग ले सकते हैं।

मोहित ऐसे ही स्कूल से सीख कर एक गिटार वादक बना। आज वह कितनी ही प्रतियोगिताओं में नाम कमा चुका है। छोटी सी उम्र में प्रसिद्ध हो गया। इन सबके अलावा इस उम्र में जीवन के क्या वैल्यू होते हैं, बड़ों की किस तरह रिस्पेक्ट की जाती है, यह भी सिखाना चाहिए। दयालुता और मदद करने का गुण भी उनके अंदर विकसित करना चाहिए। केशव इसी उम्र का बच्चा है वह ग्राउंड में खेल रहा होता है, तभी सामने के घर में रहने वाले दादाजी बाजार से कई बार सामान ला रहे होते हैं। वह सामान उनके हाथ से ले कर घर तक पहुंचाने में उनकी मदद करता है। उसकी देखा-देखी अन्य बच्चों में भी यह गुण आ गया है।

भाषा के लिए कहानी पढ़ कर अंत बदलना या उसको अपनी रचनात्मकता का पुट देकर अपनी भाषा में लिखना। इससे भाषा पर पकड़ मजबूत होगी। और अपने विचारों को व्यक्त करने की तवज्जों मिलेगी।

 यह तो हुई गुणात्मक और रचनात्मक कार्य सिखाने की बातें, पर बच्चों का मनोरंजन भी अनिवार्य है तो उनके सैर सपाटे का भी ध्यान रखना चाहिए, क्यों कि अभी छुट्टियां है, बच्चे हर समय तो ज्ञान के वातावरण में नहीं रह सकते, उन्हें कहीं सैर सपाटे के लिए ले जाएं। निम्नलिखित जगहों पर जा सकते हैं 

1. उन्हें प्रकृति के करीब , नेशनल वन्य पार्क, जिम कॉर्बेट ले जा सकते हैं जिसमें वह प्राकृतिक वातावरण से जुड़ेंगे।

2. नैनीताल, उत्तराखंड -नैनी झील में बोटिंग व सैर।

3. दार्जिलिंग, पशिचम, बंगाल - काम ट्रेन की सवारी।

4. आगरा का ताजमहल, झांसी का किला, फतेहपुर सीकरी।

5. कानपुर का ब्लू बर्ड थीम, लखनऊ का पार्क।

6. मनाली हिमाचल प्रदेश में हिल स्टेशन पर रोहतांग पास में बर्फ से खेलना 

7. उटी, यहां काम ट्रेन की सवारी करना।

8. बिचेज, गोवा के, मुंबई के तट और अंडमान के समुद्री तट।

9. जयपुर के व राजस्थान के किले।

10. दिल्ली का कुतुब मीनार, संग्रहालय और अनेक दर्शनीय स्थल।

तो देखा आपने बच्चों को तर्क संगत बातें सिखाकर, छुट्टियों में उनका मनोबल तो बढ़ाया ही जा सकता है साथ ही उनके अंदर अच्छी आदतें भी विकसित होती हैं, समय का सदुपयोग तो होता ही है और छुट्टियां बड़ों के लिए भी सिरदर्द न होकर एक दिलचस्प मुद्दा बन जाती है। जरूरत है थोड़े सिकल और ंसमझदारी के साथ उपाय अपनाने की। इन सारे प्लान को अपना कर देखिए आपके बच्चों की छुट्टियां दिलचस्पी का सबब बन जाएंगी।।

- पूनम भटनागर, लेखिका