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भारतीय मजदूर संघ के तीन दिवसीय 21वें त्रैवार्षिक अखिल भारतीय अधिवेशन का उद्घाटन

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पुरी, ओडिशा

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि देश के पुनर्निर्माण में श्रम शक्ति और युवा शक्ति का योगदान सर्वोपरि है। श्रम शक्ति और युवा शक्ति के सामर्थ्य से ही देश को विकसित राष्ट्र बनाने के स्वप्न को पूर्ण किया जा सकता है।

स्व. ओम प्रकाश अग्गी सभागार, पुरी में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के तीन दिवसीय 21वें त्रैवार्षिक अधिवेशन में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री डॉ. मांडविया ने कहा कि भारत सामर्थ्य और सशक्त देश रहा है, लेकिन एक लम्बे समय तक परतंत्र रहा, इसलिए इसकी चमक क्षीण हुई है। हम फिर से श्रम शक्ति और युवा शक्ति की बदौलत भारत को सशक्त बनाने की दिशा में प्रयासरत हैं। निश्चित, भारत एक बार फिर चमकेगा।


उन्होंने कहा कि भारतीय मजदूर संघ, श्रम और श्रमिकों के हितों की बात करता है। बीएमएस ने श्रम और श्रमिकों के हित में केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन सुझावों पर केंद्र सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। इस अधिवेशन से निकलने वाले विचार और सुझाव को भी सरकार प्राथमिकता देगी। बीएमएस भारत का सबसे बड़ा श्रमिक संगठन तो है ही, यह संगठन विश्व के सबसे बड़े संगठनों में से भी एक है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र की सरकार ने श्रम कानून लागू किया है और उन्हें इस बात का गर्व है कि भारतीय मजदूर संघ ने इसे स्वीकारा है और श्रमिकों के बीच जन-जागरण चला रहा है। यह संगठन राष्ट्र और श्रमिकों के हितों की पहल करने वाला श्रम संगठन है। श्रम कानून सभी श्रमिकों के लिए हितकारी है। यह कानून महिला एवं पुरुष के भेदभाव को खत्म करता है, समान काम का समान वेतन और स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी देता है। यह कानून देश के श्रमिकों के उत्थान हेतु आवश्यक है।


देश बदल रहा है, नव भारत का निर्माण हो रहा है, और श्रमिक कल्याण हेतु भारत की सरकार प्रयत्नशील है। निश्चित तौर पर विकास की इस दौड़ में कोई भी पीछे नहीं छूटेगा, सबका विकास होगा।

भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष हिरण्मय पांड्या ने बीएमएस आज भारत का एक नंबर का श्रमिक संगठन बन चुका है। धीरे-धीरे विश्व के बड़े श्रमिक संगठनों के साथ मित्र संगठन का भाव विकसित किया है। इन वर्षों में बहुत उपलब्धियां मिली है। एल-20 की अध्यक्षता करने का अवसर बीएमएस को मिला है। भारतीय मजदूर संघ एकमात्र संगठन है, जिसने अखंड रहते हुए 70 वर्ष की यात्रा को पूर्ण किया है। उन्होंने आने वाले दिनों की चुनौतियाँ भी बतायी और कहा कि चुनौतियों का समाधान भी बीएमएस को करना होगा।

तीन दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन झंडोत्तोलन और दीप प्रज्ज्वलित कर हुआ। उद्घाटन सत्र के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य वी. भागैय्या जी, एफएनआरपी रूस के अध्यक्ष सेरगेई चेरनोगेव, आईएलओ के प्रतिनिधि मिसिको मियामोटो, भारतीय मजदूर संघ के संयुक्त महामंत्री सुरेन्द्र पांडेय मंचस्थ थे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता अखिल भारतीय अध्यक्ष हिरण्मय पांड्या ने की, जबकि संचालन अखिल भारतीय महामंत्री रविंद्र हिमते ने किया। अतिथियों का स्वागत बीएमएस, उड़ीसा के प्रांत अध्यक्ष बादल महाराणा ने किया।

देश के 28 प्रांतों से करीब 2500 प्रतिनिधि अधिवेशन में भाग ले रहे हैं। अधिवेशन में ब्राजील, रूस, नेपाल, इंडोनेशिया, चीन आदि देशों के श्रमिक प्रतिनिधि भी शामिल हैं। इस अवसर पर सरस्वती शिशु निकेतन, पुरी के छात्रों ने वन्दे मातरम का गान किया।