नक्सली आतंक पर लगा अंकुश
- गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी आतंकियों द्वारा हिंसा की घटनाएं 2019 में 501 थीं, जो 2024 में घटकर 374 रह गई हैं।
- इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिकों + सुरक्षा बलों) की संख्या में भी 26 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2019 में 202 मौतों से घटकर 2024 में 150 है।
नई दिल्ली। वामपंथी आतंक के खतरे से समग्र रूप से निपटने को लेकर सरकार की नीति के परिणाम दिख रहे हैं। नीति में सुरक्षा संबंधी उपायों, विकास कार्यक्रमों, स्थानीय समुदायों के अधिकारों को सुनिश्चित करने, आदि को शामिल करते हुए रणनीति की परिकल्पना की गई और नीति के दृढ़ कार्यान्वयन के परिणामस्वरूप नक्सली हिंसा और उनके भौगोलिक विस्तार में कमी आई है। वामपंथी आतंकियों द्वारा हिंसा की घटनाएं 2010 में अपने उच्चतम स्तर 1936 पर पहुंच गई थीं, लेकिन 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिकों + सुरक्षा बलों) की संख्या में भी 85 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2010 में 1005 मौतों से घटकर 2024 में 150 है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पिछले 06 वर्षों के दौरान, वामपंथी आतंकियों द्वारा हिंसा की घटनाएं 2019 में 501 थीं, जो 2024 में घटकर 374 रह गई हैं। इस अवधि के दौरान कुल मौतों (नागरिकों + सुरक्षा बलों) की संख्या में भी 26 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2019 में 202 मौतों से घटकर 2024 में 150 है।
पिछले 06 वर्षों में वामपंथी आतंक की घटनाओं का राज्यवार विवरण नीचे दिया गया है।
वर्ष 2022 और 2023 में हिंसा में बढ़ोतरी वामपंथी आतंक विरोधी अभियानों में वृद्धि के कारण है, क्योंकि सुरक्षा बलों ने सीपीआई (माओवादी) के मुख्य क्षेत्रों में जाकर उनके खिलाफ अभियान शुरू किया। वामपंथी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या में भी गिरावट आई है। अप्रैल 2018 तक वामपंथी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर 90 रह गई है, जुलाई 2021 तक यह संख्या 70 और अप्रैल 2024 तक घटकर 38 रह गई है।
सुरक्षा के मद्देनजर केन्द्र सरकार वामपंथी आतंक से प्रभावित राज्यों को केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बटालियन, राज्य पुलिस बलों के आधुनिकीकरण के लिए प्रशिक्षण और धन, उपकरण और हथियार, खुफिया जानकारी साझा करना, सुरक्षा की दृष्टि से मजबूत पुलिस स्टेशनों का निर्माण आदि उपलब्ध करवा रही है।
सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) योजना के तहत 2014-15 से 2024-25 के दौरान 3260.37 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। विशेष आधारभूत योजना (एसआईएस) के तहत 1741 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। योजना के तहत पहले से निर्मित 400 एफपीएस के अलावा 226 एफपीएस का निर्माण किया गया।
इसके अलावा, वामपंथी आतंक प्रबंधन के लिए केंद्रीय एजेंसियों को सहायता (एसीएएलडब्ल्यूईएम) योजना के तहत हेलीकॉप्टरों और वामपंथी आतंक प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा शिविरों में महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए 2014-15 से 2024-25 की अवधि के दौरान 1120.32 करोड़ रुपये दिए गए हैं।
सड़क संपर्क के विस्तार के लिए 14,618 किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है।
वामपंथी आतंक प्रभावित क्षेत्रों में दूरसंचार संपर्क में सुधार के लिए 7,768 टावर लगाए गए हैं।
कौशल विकास के संबंध में 46 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) और 49 कौशल विकास केंद्र (एसडीसी) शुरू किए गए हैं।
आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए 178 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस) शुरू किए गए हैं।
वित्तीय समावेशन के लिए डाक विभाग ने बैंकिंग सेवाओं के साथ 5731 डाकघर खोले हैं। 1007 बैंक शाखाएं और 937 एटीएम खोले गए हैं और वामपंथी आतंक से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में 37,850 बैंकिंग पत्राचार शुरू किए गए हैं।