चम्पावत,उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड की देवभूमि अपनी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के लिए जानी
जाती है। यहां आयोजित होने वाले धार्मिक मेले न केवल श्रद्धालुओं की आस्था का
केंद्र होते हैं, बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा देते हैं। इसी कड़ी में
चंपावत जिले के तनकपुर में लगने वाला पूर्णागिरी मेला उत्तर भारत के प्रमुख
धार्मिक आयोजनों में विशेष स्थान रखता है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चम्पावत जिले
के तनकपुर में वार्षिक पूर्णागिरी मेले का विधिवत उद्घाटन किया। 109 दिनों तक चलने वाले इस
मेले में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। यह मेला उत्तर भारत के सबसे
बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसका समापन 15 जून को होगा।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार
धार्मिक पर्यटन को और सशक्त बनाने के लिए पूर्णागिरी क्षेत्र में साल भर मेले के
आयोजन की योजना पर कार्य कर रही है। तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाने के उद्देश्य
से क्षेत्र में स्थायी अवसंरचना विकसित की जाएगी। उन्होंने जानकारी दी कि मंदिर तक
रोपवे निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसके पूरा होने से श्रद्धालुओं के लिए आवागमन कहीं अधिक सुगम हो जाएगा।
पर्यटन को नई गति देने के लिए मुख्यमंत्री
ने पूर्णागिरी के आसपास स्थित धार्मिक और पर्यटन स्थलों को एक सर्किट से जोड़ने की
घोषणा भी की। मानसखण्ड मंदिरमाला मिशन के तहत क्षेत्र में बुनियादी ढांचे और
सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों को लाभ मिलेगा। इसके अलावा, धामी ने चंपावत में 65 करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई पांच
विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।
उल्लेखनीय है कि पूर्णागिरी मंदिर समुद्र
तल से लगभग 5,500 फीट की ऊंचाई पर, तनकपुर से करीब 17 किलोमीटर दूर शारदा नदी के किनारे स्थित एक पहाड़ी पर विराजमान है। मंदिर तक
जाने वाले मार्ग का लगभग 14 किलोमीटर हिस्सा मोटर योग्य है, जबकि शेष 3 किलोमीटर की दूरी श्रद्धालुओं को पैदल तय करनी पड़ती है।



