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संघ का ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है - रामलाल जी

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रांची

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त प्रमुख जन गोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। गोष्ठी में अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। भारत माता के चित्र के समक्ष पुष्पांजलि व दीप प्रज्ज्वलन से गोष्ठी का शुभारंभ हुआ। प्रांत संपर्क प्रमुख राजीव कमल बिट्टू जी ने प्रस्तावना रखते हुए प्रमुख जनों का स्वागत किया। रामलाल जी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, विकास यात्रा, मूल उद्देश्यों एवं कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला।



रामलाल जी ने कहा कि संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जन्मजात देशभक्त थे। उनके जीवन की अनेक घटनाएं इस तथ्य को स्पष्ट करती हैं। स्कूल में वंदे मातरम बोलने के कारण निष्कासन भी झेलना पड़ा। डॉ. हेडगेवार का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रभाव, संगठन एवं समाज-निर्माण के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का प्रतीक है।

संघ की स्थापना के समय से ही डॉ. हेडगेवार की दृष्टि हिन्दू समाज को संगठित करने, भेदभाव रहित समाज का निर्माण करने पर केंद्रित रही। संघ का मूल ध्येय सज्जन शक्ति से युक्त, संगठित, आत्मनिर्भर एवं राष्ट्रहित में समर्पित समाज का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि समाज में संघ के विषय में अनेक गलत धारणाएं प्रचलित हैं। संघ का कार्य व्यवहार और प्रवृत्ति से जाना जाता है, न कि प्रचार से।

देश विभाजन (1947) के कालखंड का उल्लेख करते हुए बताया कि उस विकट समय में भी संघ स्वयंसेवकों ने पीड़ित हिन्दुओं की सहायता, सुरक्षा और सुरक्षित पुनर्वास के लिए समर्पण भाव से कार्य किया।

रामलाल जी ने कहा कि संघ स्वयंसेवक किसी भी भेदभाव के बिना समाज के प्रत्येक वर्ग की सेवा करते हैं। चरखी दादरी विमान दुर्घटना का जीवंत उदाहरण देते हुए बताया कि उस विमान में अरब देशों के यात्री थे, जिनमें अधिकांश मुस्लिम परिवार थे। फिर भी संघ के स्वयंसेवकों ने मानवता को सर्वोपरि रखते हुए निष्कपट सेवा की। इस अलौकिक सेवा कार्य के लिए वहां के लोगों ने संघचालक को मस्जिद में बुलाकर सम्मानित किया। “हमें प्रचार नहीं करना है, लेकिन सत्य तथ्य समाज के समक्ष रखना आवश्यक है।”

उन्होंने कहा कि संघ का संपर्क समाज के विभिन्न वर्गों, विचारधाराओं एवं राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों से निरंतर बना रहता है। संघ स्वयंसेवक शिक्षा, सेवा, ग्राम विकास, आपदा राहत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय जीवन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। जहां सरकारी विद्यालय नहीं हैं, वहां हजारों एकल विद्यालय संघ स्वयंसेवक चला रहे हैं। जोर देकर कहा, “संघ व्यक्ति निर्माण का केंद्र है”।

रामलाल जी ने कहा कि शताब्दी वर्ष में संघ पंच परिवर्तन का विषय लेकर घर-घर संपर्क, नागरिक गोष्ठियों और समाज संवाद के माध्यम से जनजागरण का कार्य कर रहा है। सज्जन, प्रभावी और राष्ट्रहित में सोचने वाली सामाजिक शक्ति को साथ लेकर भारत को अधिक संगठित, सक्षम और विश्व कल्याण के भाव से युक्त बनाने का उद्देश्य है।



कार्यक्रम में समाज के अनेक प्रमुख जन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। प्रमुख जन गोष्ठी न केवल शताब्दी वर्ष का महत्वपूर्ण आयोजन था, बल्कि समाज में प्रचलित भ्रांतियों को दूर करने और राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने का मंच भी है। रामलाल जी ने सभी उपस्थित जन को चिंतन एवं राष्ट्र निर्माण में सहभागिता के लिए प्रेरित किया।