कहते हैं यदि सच्चे मन से साधना की जाए तो असंभव भी संभव बन जाता है। ऐसी ही दृढ़ विश्वास और कामयाबी की कहानी है बिजनौर, उत्तर प्रदेश के राधे-कृष्ण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की। इस ग्रुप की सुमन ने अपने कन्हैया के लिए एक बार पोशाक बनाना शुरू किया, फिर तो क्या मानो सुमन के लिए जीवन के नये रास्ते मिल गये और रोजगार का स्थायी साधन भी। उनके हाथों से बने राधा-रानी के पोशाक देखते ही बनते हैं। उनके हाथों की कारीगरी देखकर लोग आश्चर्यचकित हो जाते हैं। इसके चलते उनके एक-एक पोशाक आठ से दस हजार रुपये में बिक रहे हैं। इस ग्रुप के बारे में जानकारी तब सामने आई जब पिछले दिनों लखपति दीदियों को सम्मानित करने के लिए सम्मान समारोह आयोजित हुआ।



