लखनऊ, उत्तर प्रदेश
संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों के लिए अब चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने का नया रास्ता खुल गया है, जी हां केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने घोषणा की है कि संस्कृत के छात्र अब आयुर्वेद डॉक्टर बन सकते हैं। इसके लिए सात वर्ष छह महीने का विशेष पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। यह निर्णय अथर्ववेद के उपवेद आयुर्वेद की विश्व-स्तर पर बढ़ती मान्यता और आयुर्वेदिक उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए लिया गया है।
आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता पोर्टल की शुरुआत
बता दें आयुर्वेद गुरुकुल संबद्धता पोर्टल का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी और राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग की अध्यक्ष डॉ. मनीषा यू. कोठेकर ने किया। देशभर की योग्य संस्कृत संस्थाएं अब इस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर आयुर्वेद गुरुकुल से जुड़ सकेंगी। वही पंजीकरण, निरीक्षण और संबद्धता की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी। यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संतुलन देखने को मिलेगा। आयुर्वेद, संस्कृत, योग, दर्शन और संहिता का एक साथ अध्ययन गुरुकुल प्रणाली के माध्यम से संभव होगा, जिससे छात्रों को समग्र शिक्षा मिलेगी। यह पहल न केवल संस्कृत छात्रों के लिए नए अवसर खोलेगी, बल्कि भारतीय आयुर्वेद और ज्ञान परंपरा को वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान भी दिलाएगी।
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