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भारतीय सेना ने पिथौरागढ़ के गुंजी गांव में फिर जलाया शिक्षा का दीप

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भारतीय सेना ने पिथौरागढ़ के गुंजी गाँव में फिर जलाया शिक्षा का दीप


पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड

भारत-चीन सीमा से सटे उच्च हिमालयी क्षेत्र के प्रथम वाइब्रेंट विलेज गुंजी में भारतीय सेना ने शिक्षा को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। 

जी हां, करीब तीन दशक से बंद पड़े राजकीय प्राथमिक विद्यालय का सेना ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत पुनर्निर्माण कर गांव में शिक्षा की नई उम्मीद जगाई है। इस प्रयास से सीमांत क्षेत्र के बच्चों को अब अपने गांव में ही बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।


जानकारी के अनुसार, व्यास घाटी की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और शीतकालीन पलायन के कारण वर्ष 1991 में यह विद्यालय बंद हो गया था। अब भारतीय सेना ने लगभग 72 लाख रुपये की लागत से स्कूल भवन को आधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया है। स्कूल में कंप्यूटर लैब, किड्स पार्क और बच्चों के लिए बेहतर शिक्षण व्यवस्था की गई है।


हाल ही में सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने गांव पहुंचकर नए भवन का लोकार्पण किया। इस दौरान ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सेना का स्वागत किया। उद्घाटन के बाद भवन को ग्राम सभा गुंजी को सौंप दिया गया। ग्राम सभा के अनुसार नए शिक्षा सत्र से गुंजी, नाबी, कुटी, रोंगकोंग और नपलच्यू गांवों के बच्चों का नर्सरी में प्रवेश शुरू किया जाएगा। शुरुआती दौर में सेना नर्सरी कक्षाएं संचालित करेगी। बाद में सरकारी शिक्षकों की नियुक्ति के बाद इसे शिक्षा विभाग को सौंपकर नियमित सरकारी स्कूल के रूप में चलाने की योजना है। ग्रामीणों ने इस पहल को सीमांत क्षेत्र के विकास और बच्चों के भविष्य के लिए बड़ा कदम बताया है। 


गुंजी गांव आदि कैलास और कैलास मानसरोवर यात्रा का प्रमुख पड़ाव होने के साथ भारत-चीन सीमा व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। भारतीय सेना की यह पहल सीमांत गांवों में शिक्षा और विकास को नई दिशा देने का काम करेगी।