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जौनसार में परंपरा और सामाजिक संतुलन की अनूठी पहल

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जौनसार में परंपरा और सामाजिक संतुलन की अनूठी पहल 


जौनसार देहरादून उत्तराखंड


आज के दौर में जहां दिखावे और फिजूलखर्ची की प्रवृत्ति लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं उत्तराखण्ड के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर ने समाज को एक नई दिशा देने का प्रयास किया है यहां के ग्रामीणों ने सामाजिक समानता, आर्थिक संतुलन और अनावश्यक खर्च पर रोक लगाने के उद्देश्य से सोने के गहनों के सीमित उपयोग का निर्णय लेकर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है और खास बात यह है कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की हालिया अपील से भी पहले शुरू हो चुकी थी।


16 अक्टूबर 2025 को चकराता तहसील के कंघाड़ गांव में तीन गांवों के लोगों की बैठक हुई, जिसमें महिलाओं द्वारा सीमित आभूषण पहनने का निर्णय लिया गया इसके बाद जौनसार बावर के कई और गांवों में यह पहल तेजी से बढ़ने लगी है और अब कई गांवों में महिलाएं केवल कान, नाक और गले में ही सोने के गहने पहने दिखाई देती हैं


ग्रामीणों का मानना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवार अक्सर समाज में प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए कर्ज लेकर महंगे गहने बनवाते हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ता है, वहीं जो महिलाएं अधिक गहने नहीं पहन पातीं, उनमें हीनभावना पैदा होती है  इसी सामाजिक असंतुलन को समाप्त करने के लिए यह निर्णय लिया गया।


केवल आभूषण ही नहीं, बल्कि शादी-विवाह में भी सादगी अपनाने के फैसले किए गए हैं कई गांवों में विवाह समारोह में सिर्फ एक मीठा व्यंजन परोसने और पहली शादी में मिठाई का केवल एक डिब्बा देने जैसी परंपराएं लागू की गई हैं  ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल सामाजिक सौहार्द, आर्थिक बचत और समानता को मजबूत करेगी।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में देशवासियों से एक वर्ष तक सोना न खरीदने और आर्थिक संसाधनों का समझदारी से उपयोग करने की अपील की थी।