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पहाड़ों में फल रहा सफलता का बगीचा, किसान बना प्रेरणा

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नैनीताल, उत्तराखण्ड

पहाड़ों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद यदि कोई व्यक्ति दृढ़ निश्चय, मेहनत और नई सोच के साथ आगे बढ़े तो उससे सफलता जरुर मिलती है। नैनीताल के गजर गांव के किसान देवेन्द्र सिंह बिष्ट इसकी जीवंत प्रेरणा हैं। उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी पुश्तैनी जमीन को नई पहचान देने का संकल्प लिया और बंजर पड़ी भूमि को आधुनिक बागवानी के माध्यम से एक सफल उद्यम में बदल दिया। उनकी यह कहानी न केवल किसानों के लिए प्रेरणा है, बल्कि उन युवाओं के लिए भी संदेश है जो खेती को लाभकारी व्यवसाय के रूप में अपनाना चाहते हैं।

जानकारी के अनुसार, देवेन्द्र सिंह बिष्ट पहले नौकरी करते थे, लेकिन गांव और खेती से उनका गहरा लगाव उन्हें वापस अपनी जड़ों की ओर ले आया। जब उन्होंने अपनी पुश्तैनी जमीन की स्थिति देखी तो पाया कि उसका बड़ा हिस्सा वर्षों से बंजर पड़ा हुआ था। उन्होंने पारंपरिक खेती के बजाय आधुनिक और वैज्ञानिक बागवानी को अपनाने का निर्णय लिया और सेब की सघन बागवानी शुरू की।

आज उनके एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगभग 4,000 पौधे लगे हुए हैं। इनमें सेब के अलावा कीवी, चेरी, अखरोट और आलूबुखारा जैसे उच्च मूल्य वाले फलदार पौधे भी शामिल हैं। बेहतर उत्पादन और गुणवत्ता के लिए उन्होंने आधुनिक ट्रेलिस सिस्टम तथा ड्रिप इरिगेशन तकनीक का उपयोग किया है। इन तकनीकों से पौधों को आवश्यक मात्रा में पानी और पोषण मिलता है, साथ ही पानी और श्रम दोनों की बचत होती है।

बगीचा स्थापित करने के शुरुआती वर्षों में उन्हें धैर्य और निरंतर मेहनत करनी पड़ी। वैज्ञानिक तरीके से पौधों की देखभाल, समय पर छंटाई और संतुलित पोषण प्रबंधन का परिणाम अब दिखाई देने लगा है। बागान की स्थापना के लगभग छह वर्ष बाद उन्हें करीब 9 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। उनके बगीचे में तैयार होने वाले उच्च गुणवत्ता वाले सेब स्थानीय बाजारों के साथ-साथ दिल्ली की मंडियों तक पहुंच रहे हैं।

देवेन्द्र सिंह बिष्ट का लक्ष्य अपने बगीचे से प्रतिवर्ष 30 से 40 लाख रुपये का कारोबार करना है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि आधुनिक तकनीक, सही योजना और मेहनत के बल पर खेती को लाभदायक व्यवसाय में बदला जा सकता है।