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वक्फ बोर्ड ने शनि देव मंदिर से हटाया दावा, ढाई साल पुराने विवाद पर विराम

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- मिट्टी में शनिदेव और हनुमान जी की प्रतिमाएं मिलीं

- दरगाह का निर्माण मंदिर की जगह पर किया गया था।

एटा। जलेसर के प्रसिद्ध शनि देव मंदिर (पूर्व में दरगाह) को लेकर वक्फ बोर्ड ने अपना दावा वापस ले लिया है। ढाई साल पहले इस संपत्ति को लेकर उठे विवाद के बाद से यहां का प्रबंधन विवादों में था। दरगाह कमेटी के अध्यक्ष सहित नौ लोगों पर गबन के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद कमेटी को भंग कर दिया गया था। इसके बाद से इस संपत्ति पर प्रशासक नियुक्त है।

क्या है विवाद की पृष्ठभूमि -

जलेसर के देहात क्षेत्र में स्थित इस परिसर को छोटे मियां-बड़े मियां दरगाह के नाम से जाना जाता था। दशकों से यहां एक दरगाह कमेटी चढ़ावे का प्रबंधन कर रही थी। 2022 में चढ़ावे में गबन के आरोप सामने आए, जिसके बाद कमेटी को भंग कर दिया गया। इसके साथ ही यह आरोप भी उठे कि दरगाह का निर्माण मंदिर की जगह पर किया गया था।

खुदाई में मिली मूर्तियां और पूजा-अर्चना शुरू -

विवाद के दौरान परिसर की खुदाई कराई गई, जिसमें मिट्टी में शनिदेव और हनुमान जी की प्रतिमाएं मिलीं। इसके बाद यहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी गई और इसे शनि देव मंदिर का स्वरूप दिया गया।

वक्फ बोर्ड ने लिया अपना दावा वापस -

हाल ही में वक्फ संपत्तियों का सर्वेक्षण कराया गया, जिसके आधार पर वक्फ बोर्ड ने संपत्तियों की एक सूची जारी की। इस सूची में जलेसर की दरगाह का नाम शामिल नहीं है। इससे स्पष्ट है कि वक्फ बोर्ड ने इस संपत्ति पर अपना दावा छोड़ दिया है।

धार्मिक महत्व और श्रद्धालुओं का आगमन -

यह स्थान जलेसर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। बुधवार और शनिवार को यहां जात करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। दरगाह के स्थान पर शनि देव मंदिर बनने के बाद भी यहां लोगों का आना जारी है।

प्रशासक की देखरेख में प्रबंधन -

दरगाह कमेटी भंग होने के बाद से इस परिसर का प्रबंधन प्रशासक की देखरेख में चल रहा है। वक्फ बोर्ड द्वारा दावा वापस लेने के बाद यहां धार्मिक गतिविधियों को और सुचारू रूप से चलाने की उम्मीद की जा रही है। इस विवाद पर वक्फ बोर्ड के कदम पीछे खींचने के बाद स्थिति शांतिपूर्ण है। यह निर्णय क्षेत्र के धार्मिक और सामाजिक सौहार्द के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।