• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

जंगलों को आग से बचाने में महिलाओं ने निभाई अहम भूमिका

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

नैनीताल, उत्तराखण्ड

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं न केवल अपनी आजीविका मजबूत कर रही हैं, बल्कि अपने नागरिक कर्तव्य का भी उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं। जी हां, नैनीताल जिले में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने अब तक 2357 क्विंटल पीरुल एकत्रित कर ली हैं। ये पत्तियां जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण होती हैं, क्योंकि ये बेहद ज्वलनशील होती हैं और आग को तेजी से फैलाती हैं। महिलाएं इन पत्तियों को इकट्ठा कर जंगलों की आग रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इस कार्य में ओखलकांडा, रामगढ़, धारी, बेतालघाट, भीमताल और कोटाबाग क्षेत्र के 76 स्वयं सहायता समूह जुड़े हुए हैं।

इस पहल से जहां एक ओर जंगलों की आग पर नियंत्रण पाने में मदद मिल रही है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं की आय भी बढ़ रही है। महिलाएं इस पीरुल को वन विभाग और निजी संस्थानों को बेचकर अपनी आजीविका सुदृढ़ कर रही हैं।

एकत्रित किए गए पीरुल का उपयोग अब निजी कंपनियां ऊर्जा के रूप में करेंगी या इससे फायर ब्रिक्स तैयार किए जाएंगे। इस तरह यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आत्मनिर्भरता और जिम्मेदार नागरिकता का भी सशक्त उदाहरण बन रही है।