नागपुर
संतों की उपस्थिति में नागपुर के जामठा में भारत दुर्गा माता मंदिर का शिलान्यास
श्री आबाजी थट्टे सेवा और रिसर्च इंस्टीट्यूट की तरफ से प्रस्तावित भारत दुर्गा शक्ति स्थल का शिलान्यास जामठा में नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट परिसर में हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने संतों की उपस्थिति में शिलान्यास किया। सरसंघचालक जी ने कहा कि अगर भारत माता की पूजा करनी है तो सबको भारत बनना होगा और इसके लिए उन्हें भारत को जानना होगा तथा देश का सम्मान करना होगा।
शिलान्यास समारोह में श्री जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि जी, स्वामी गोविंददेव गिरि जी महाराज, चिन्मय मिशन के स्वामी मित्रानंद महाराज जी, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी, दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा जी, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जी, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी सहित अन्य उपस्थित रहे। आशुतोष अडोनी ने कार्यक्रम का संचालन किया, शैलेश जोगलेकर ने प्रस्तावना रखी।
सरसंघचालक जी ने कहा कि दुनिया में सत्य का प्रचार-प्रसार भी शक्ति के सहारे ही करना पड़ता है। हमारे देश में सत्य के लिए शक्ति की जरूरत नहीं है। लेकिन, दूसरे देशों में ‘जिसकी लाठी, उसकी भैंस’ वाली नीति अपनाई जाती है। नागपुर में भारत माता दुर्गा का भव्य मंदिर बनेगा और उसकी व्यवस्था भी स्थापित की जाएगी। लेकिन, सिर्फ उस मंदिर में ही नहीं, बल्कि पूरे भारत में रोजाना पूजा होनी चाहिए। १५० साल की गुलामी के बाद हमारे मन और बुद्धि पर पश्चिमी देशों का लेप चढ़ गया है। उसे हटाना होगा और रोजाना के कामों से लेकर देश के मुद्दों तक, हम सबको भारत बनना होगा। यह काम छोटी-छोटी चीजो से शुरू करना जरूरी है। अगर हम काम शुरू करेंगे, तो हम लक्ष्य तक जरूर पहुँचेंगे।
..तो भारत का गौरव जरूर लौटेगा
उन्होंने कहा कि आज दुनिया की अवस्था सब देख रहे हैं। लोग दुविधा में हैं कि हमारा देश विश्वगुरू बनेगा या नहीं। राम मंदिर को लेकर भी बहुत से लोग दुविधा में थे। लेकिन हमारे मन में आस्था-विश्वास था और उसी की वजह से यह सच हुआ। बड़ा सवाल यह है कि अगर दुनिया ने भारत का रास्ता नहीं अपनाया तो उनका भविष्य क्या होगा। जो ज़रूरी है, उसके बारे में कुछ भी दुविधा मन में रखने की जरूरत नहीं है। अगर हर भारतीय भारत की पूजा करेगा, तो भारत का गौरव जरूर लौटेगा और भारत शक्ति संपन्न होगा।
भारतदुर्गा माता के मंदिर से देश को प्रेरणा मिलेगी
कार्यक्रम के दौरान, सभी गणमान्य लोगों ने भारत दुर्गा माता की संकल्पना का श्रेय सरसंघचालक जी को दिया। हालांकि, सरसंघचालक जी स्पष्ट किया कि यह संकल्पना स्वर्गीय मोरोपंत जी पिंगले की थी। एकात्मता यात्रा के दौरान, भारत दुर्गा माता की मूर्तियां चार दिशाओं में गई थीं। उनमें से एक नागपुर आई थी। हालांकि, बाद में श्री राम जन्मभूमि आंदोलन शुरू हुआ। अब उनकी संकल्पना साकार हो रही है।
18 भुजाओं वाली भारत दुर्गा शक्ति की मूर्ति हैं और पूरे देश में एक नई चेतना जागृत होगी। इस मंदिर से पूरे देश को प्रेरणा मिलेगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विश्वास जताया कि इससे भक्ति और शक्ति की साधना होगी। भारत दुर्गा शक्ति स्थल के पीछे प्रेरणा भारत का निर्माण है। भारत के पुनर्निर्माण का विचार सरसंघचालक जी के मन में आया और वहीं से यह निर्माण कार्य शुरू हुआ है। भारत दुर्गा शक्ति स्थल पूरे देश को प्रेरणा देगा, ऐसा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा।
भारत दुर्गा माता मंदिर 52वां शक्तिपीठ होगा
श्री जूना अखाड़ा पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी ने कहा कि भारत सिर्फ एक भूमि नहीं, बल्कि जगदंबा का स्वरुप है। संघ का काम ईश्वरीय काम है। वहां आने वाले विचार ईश्वरीय होते हैं। इस मंदिर के माध्यम से हमें संकेत मिल रहे हैं कि देश अखंड भारत की ओर बढ़ रहा है और मुझे लगता है कि भारत की खोई हुई सीमाएं वापस मिल जाएंगी।
आज दुनिया में एक ही तरह के लोगों के बीच संघर्ष है। पश्चिम में जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। भारत उन सभी को दिशा दिखाएगा। भारत पर आक्रमण करने वाली कई संस्कृतियां गायब हो गई हैं। फ्रांसीसी, जर्मन और ब्रिटिश का युग खत्म हो गया है और आने वाला समय भारत का होगा तथा भारत ही दुनिया का नेतृत्व करेगा। पूरी दुनिया भारत का अनुसरण करेगी। योग और आयुर्वेद से हम एक तरह से विश्वगुरू बन गए हैं। भारत में 51 शक्ति पीठ हैं और भारत दुर्गा मंदिर 52वां शक्ति पीठ होगा।
सभी को शक्ति याद दिलाने की जरूरत है
दीदी मां साध्वी ऋतम्भरा जी ने कहा कि शक्ति सभी में है, बस उसे याद दिलाने की जरूरत है। हमें सोचना चाहिए कि आखिर शक्ति कहां चली गई। हिन्दुओं की शक्ति भाषा, और प्रांत की राजनीति में बंटी हुई है। अगर हम एक साथ आ जाएं, तो हम दुनिया को बदल सकते हैं। सभी को एकजुट रहना चाहिए।
धीरेंद्र कृष्णशास्त्री जी ने कहा कि भारत एक मातृ प्रधान देश है। जब भारत दुर्गा माता मंदिर बनेगा, तो देश में शक्ति आएगी और यह अखंड भारत बन जाएगा। हमने कभी पाकिस्तान माता या चीन माता की जय जयकार होते नहीं सुनी। पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में ही मां का जय जयकार होता है। दुनिया में महिलाओं को वस्तु माना जाता है, लेकिन भारत में महिलाओं को पूज्य माना जाता है।
विश्व मांगल्य के लिए भारत जरूरी
गोविंददेव गिरी जी महाराज ने कहा कि अगर हम विश्व का मांगल्य चाहते हैं, तो भारत का होना जरूरी है। उसके लिए शक्ति आवश्यक है । राम मंदिर का काम अभी पूरा नहीं हुआ है। जब तक राम राज्य नहीं बन जाता, काम पूरा नहीं होगा। संत ज्ञानेश्वर का पसायदान एक तरह से राम राज्य का वर्णन है। नासिक में हुए कॉर्पोरेट स्कैंडल के बाद अगर मन मे संताप नहीं है, तो हमें सोचना चाहिए कि हम ज़िंदा हैं या मरे हुए है। हमें ऐसे लोगों के खिलाफ़ डटकर खड़ा होना होगा। अपनी संस्कृति के हिसाब से शक्तिशाली बनना जरूरी है।



