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एक कैंसर सर्वाइवर की अनूठी सेवा

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एक कैंसर सर्वाइवर की अनूठी सेवा

शाहजहांपुर जिले के ग्राम करनपुर की रहने वाली शिखा सिंह की कहानी संघर्ष, साहस और सेवा की ऐसी मिसाल है, जो यह विश्वास जगाती है कि कठिन परिस्थितियां इंसान को तोड़ने के बजाय उसे और मजबूत बना सकती हैं। शिक्षिका, कैंसर सर्वाइवर, सामाजिक कार्यकर्ता और महिला स्वास्थ्य एवं जनजागरूकता कार्यकर्ता के रूप में शिखा आज अनेक लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनका जीवन-मंत्र है - ”मुश्किल वक्त में इंसान या तो टूटता है या निखरता है किंतु मैंने टूटने के बजाय निखरना ज्यादा उचित समझा।“

एक सितंबर 1994 को जन्मीं शिखा का पालन-पोषण एक साधारण निम्न- मध्यमवर्गीय ग्रामीण परिवार में हुआ। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से हुई। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और एम.एड. (मास्टर ऑफ एजुकेशन) तथा एम.एससी. (रसायन विज्ञान) की शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ने के साथ उन्होंने सामाजिक सेवा, महिला स्वास्थ्य, महिला शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, मेडिकल कैंप और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई।

वर्ष 2017 में शिखा के जीवन में एक बड़ा मोड़ आया। उनके पिता का निधन हो गया। उस समय वह पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर नौकरी की तैयारी कर रही थीं। परिवार में उनकी दो छोटी बहनें और एक छोटा भाई था। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां उनके कंधों पर आ गईं। उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ प्राइवेट शिक्षण कार्य शुरू किया और परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए जीवन को आगे बढ़ाया।

लेकिन जीवन की असली परीक्षा अभी बाकी थी। दिसंबर 2022 में, मात्र 28 वर्ष की उम्र में, उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली। जनवरी 2023 में उपचार के लिए उन्हें मुंबई जाना पड़ा और परिस्थितियों के कारण लगभग दस महीने वहां रहना पड़ा। यह समय उनके लिए भावनात्मक, मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। कई बार आत्मविश्वास और साहस भी डगमगाया, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने भीतर की शक्ति को फिर से जगाया। वर्ष 2023 के अंत तक उनका उपचार पूरा हुआ और वह घर वापस लौटीं। इस कठिन दौर ने उनके व्यक्तित्व को भीतर से बदल दिया। उन्होंने महसूस किया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, मनुष्य के भीतर उनसे लड़ने की शक्ति अवश्य होती है।

 मुंबई में अपने उपचार के दौरान शिखा ने कैंसर से जूझ रहे अन्य मरीजों और उनके परिवारों की मदद करना शुरू किया। उत्तर प्रदेश से मुंबई आए कैंसर मरीजों को उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग किया। टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और सेवा संगठनों के कार्यक्रमों में उन्होंने अपने अनुभव साझा किए और कैंसर मरीजों के बीच आशा, साहस और सकारात्मकता का संदेश पहुंचाया।

वह कैंसर मरीजों और उनके परिवारों को उचित अस्पताल एवं उपचार केंद्र की जानकारी देने, उपचार शुरू कराने में सहयोग करने, आवश्यक प्रक्रियाओं को समझाने, सरकारी सहायता की जानकारी देने और आर्थिक सहायता के उचित माध्यमों से जोड़ने का प्रयास करती हैं। उनका मानना है कि जिस पीड़ा से वह स्वयं गुजरी हैं, उसे दूसरों के लिए राह आसान बनाने की शक्ति में बदलना ही उनकी सेवा का उद्देश्य है। शिखा सिंह की यात्रा केवल कैंसर से जीत की कहानी नहीं, बल्कि यह संदेश है कि अपने संघर्ष को यदि सेवा और सकारात्मकता में बदल दिया जाए, तो वही संघर्ष किसी और के जीवन में उम्मीद की रोशनी बन सकता है।