बच्चों के सुरक्षित भविष्य की आवाज
(नीति तोमर का सफर शिक्षा, पत्रकारिता, पर्यावरण और सामाजिक सेवा से होते हुए बच्चों को नशे से बचाने की मुहिम तक पहुँचा)
इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की शैक्षिक पृष्ठभूमि रखने वाली नीति तोमर की पहचान केवल एक शिक्षाविद और पर्यावरणविद तक सीमित नहीं है। पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में भी उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। उनके लेख विभिन्न समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। तथा वह राष्ट्रीय समाचार-पत्र उदयभूमि की प्रबंध संपादक के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं। उनके अनुभव ने उन्हें समाज के मुद्दों को समझने, उन्हें लोगों तक पहुँचाने और जनजागरूकता को प्रभावी माध्यम देने की क्षमता प्रदान की।
समाज में परिवर्तन के लिए हमेशा बड़े मंच की आवश्यकता नहीं होती। कई बार एक संवेदनशील सोच, दृढ़ संकल्प और निरंतर किए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयास ही बड़े बदलाव की नींव रखते हैं। नीति तोमर का जीवन इसी विश्वास की प्रेरक मिसाल है। शिक्षा, पत्रकारिता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सेवा से जुड़ी उनकी यात्रा आज बच्चों और किशोरों को नशे की नई प्रवृत्तियों से बचाने के एक महत्वपूर्ण सामाजिक अभियान तक पहुँच चुकी है।
शैक्षणिक रूप से मजबूत पृष्ठभूमि रखने वाली नीति तोमर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में एम.एससी. तथा पर्यावरण विज्ञान में पीएच.डी. की। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें जल संसाधन संरक्षण, जैव विविधता और प्रकृति संरक्षण जैसे विषयों से लगातार जोड़े रखा। वे इंडियन बॉटनिकल सोसायटी की आजीवन सदस्य भी हैं।
नीति तोमर के सामाजिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय आज Mothers Against Vaping (MAV) से जुड़ा है। वे इसकी फाउंडर मेंबर के रूप में बच्चों और किशोरों को वेपिंग तथा निकोटीन की लत से बचाने के लिए जागरूकता अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
Mothers Against Vaping के अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहचान तब मिली, जब इसके एक कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम में बच्चों और युवाओं के बीच बढ़ती वेपिंग की प्रवृत्ति और उसके संभावित सामाजिक प्रभावों पर चर्चा हुई।
नीति तोमर और उनकी टीम के लिए यह केवल एक अभियान की उपलब्धि नहीं है। यह उस विश्वास की पुष्टि है कि यदि सामाजिक सरोकार को निरंतरता, तथ्य और सही दिशा के साथ उठाया जाए, तो उसकी आवाज समाज से निकलकर नीति-निर्माण के मंच तक पहुँच सकती है।
सामाजिक सेवा से उनका जुड़ाव भी लंबे समय से रहा है। वे देवदूत वानर सेना की सक्रिय सदस्य हैं और मानवीय सेवा से जुड़े कार्यों में योगदान देती हैं। उनके सामाजिक सरोकारों का दायरा बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा से लेकर पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सेवा तक फैला हुआ है।
नीति तोमर की यात्रा बताती है कि किसी एक क्षेत्र में उपलब्धि हासिल करना ही सामाजिक योगदान नहीं है। ज्ञान जब संवेदना से जुड़ता है और संवेदना जब संकल्प में बदलती है, तब एक व्यक्ति समाज में वास्तविक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।उनका विश्वास है कि किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आने वाली पीढ़ी होती है। यदि बच्चों को सही शिक्षा, सही दिशा और सुरक्षित वातावरण मिले, तो वे न केवल अपने जीवन को बेहतर बनाएँगे, बल्कि देश के भविष्य को भी नई दिशा देंगे। प्रकृति के संरक्षण से लेकर बच्चों के भविष्य की सुरक्षा तक, नीति तोमर की यात्रा एक ही विचार से जुड़ी है- समाज को बेहतर बनाने के लिए केवल चिंता करना पर्याप्त नहीं, उसके लिए निरंतर खड़े होना आवश्यक है। बच्चों को नशे से बचाना केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक पूरी पीढ़ी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है।




