त्यौहार सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रभावी माध्यम
त्यौहार सांस्कृतिक आदान प्रदान के प्रभावी माध्यम हैं। इसमें सीमाओं का बंधन नहीं होता है। उत्सव दर्शकों को आर्कषित करने के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के बीच समझ और प्रशंसा को भी बढ़ावा देते हैं। जिससे संस्कृतियों को एक दूसरे से सीखने का अवसर मिलता है। इससे पर्यटन, आतिथ्य क्षेत्रों को भारी बढ़ावा मिलता है। सामुदायिक पहचान और सामाजिक सद्भाव बढ़ता है और सांस्कृतिक एकीकरण के अवसर पैदा हुए हैं। अब हमारे पर्व, त्यौहार दुनिया भर के लोगों को जोड़ते हैं।
अट्टुकल पोंगल 3 मार्च, तिरुवनंतपुरम, केरल के अट्टुकल भगवती मंदिर में मनाया जाने वाला, यह महिलाओं का सबसे बड़ा धार्मिक समागम माना जाता है। दुनिया का सबसे बड़ा ‘आट्टुकल पोंगाला’ महिला उत्सव!! अट्टुकल भवानी मंदिर तिरुअनंतपुरम केरल में मनाया जाता है। आट्टुकल पोंगाला दुनिया में महिलाओं का सबसे बड़ा जमावड़ा होने के कारण 2009 में गिन्नी बुक ऑफ वर्ड रिकार्ड में दर्ज करवा चुका है। जिसमें 25 लाख महिलाओं ने गुड़, नारियल, केले से पायसम बनाया। इसमें पुरुषों का प्रवेश मना है।
फाल्गुन मास की पूर्णिमा को रात को होलिका दहन होता है। बैर उत्पीड़न की प्रतीक होलिका मुहूर्त पर जलाई जाती है। होलिका जलने के बाद बचता है प्रहलाद!!
होली 4 मार्च, और प्रहलाद यानि आनन्द बचता है जिसे बहुत हर्षाेलास से रंगों से सराबोर शिव के गण बने, एक दूसरे को शिव के बराती बनाते हैं। शिव की बारात (होली का जुलूस) निकालने के बाद सब नए कपड़े पहन कर एक दूसरे के घर होली मिलने जाते हैं। जिसके लिए महिलाएं तीन चार दिन पहले से मीठे, नमकीन बनाकर तैयारी करती हैं। अमेरिका प्रवास के दौरान मैंने जाना गीता दित्या के हम उम्र गैर भारतीय बच्चे होली को भूले नहीं थे और आने वाले दिनों में होली का इंतजार कर रहे थे। जिसमें बच्चे खुश तो परिवार भी खुश। लगता है होली उनका प्रिय त्यौहार हो गया है। भारतीय त्यौहारों में कथाएं, पारंपरिक संगीत और नृत्य, स्वादिष्ट व्यंजन, परिवार और मित्रों का इक्ट्ठा होना मुख्य आर्कषण होता है। होली के रंग और गीत उल्लास को बढ़ाते हैं। डिजिटल युग और बॉलीवुड ने हमारे होली के त्यौहार के प्रभाव प्रसार में क्रांति ला दी है। होली पर गीत तकरीबन हर पिक्चर में होता है और बॉलीवुड की फिल्में दुनिया भर में देखी जाती हैं। होली केवल स्थानीय उत्सव नहीं रह गया है। वह दुनियां भर के लोगों को जोड़ रहा है। आज देश दुनिया के पर्यटक ब्रज की लट्ठमार होली देखने आते हैं। विदेश में जहां भारतीय मूल के लोग अधिक हैं, वे मिलजुल कर मनाते हैं।
जिसमें देश दुनिया के वहां रहने वाले प्रवासी और स्थानीय लोग भी शामिल होते हैं। मैं वेस्ट हॉलीवुड, लॉस एंजेलस गई। यहां भारतीय कम हैं तो भी वहां लॉन्ग बीच आदि पर महीने में वीकएंड पर, चार बार पर अलग अलग कंपनियों ने अलग-अलग जगह, अलग-अलग दिन होली के त्यौहार का आयोजन किया। हिंदुओं के अलावा और लोग भी आते हैं, तभी तो इतने बड़े कार्यक्रम होते हैं। होली की छुट्टी तो होती नहीं हैं इसलिए होली के दिन त्यौहार न मना कर, लोगों की सुविधा, अनुसार संडे को मना लेते हैं। जो लोग भारत नहीं आ सकते हैं, उनके लिए विदेशों में होली हो जाती है। जमकर रंग खेला जाता है, पारंपरिक व्यंजन खाए जाते हैं। सेल्फी प्वाइंट होते हैं, रंग लगे लोग सपरिवार फोटो लेते हैं। समुद्री रेत पर होली खेली जाती है, धुलाई, सफाई की भी जरूरत नहीं है। संगीत के बिना उत्सव कैसा! विद्वानों का मानना है जो जनजातियाँ नाचती गाती नहीं, उनकी संस्कृति मर जाती है। बॉलीवुड से कलाकार बुलाए जाते हैं। जमकर नाच गाना होता है। प्रोड्यूसर पूजा कोहली तनेजा परिवार क्यूपर्टिनों शहर में रहता है। क्यूपर्टिनों, विश्वप्रसिद्ध सिलिकॉन वैली के पश्चिमी छोर पर सांता क्रूज पर्वत की तलहटी में स्थित है। कैलिफोर्निया का यह शहर एप्पल कम्प्यूटर इंक. और उच्च श्रेणी के पब्लिक स्कूलों के कारण मशहूर है। पूजा परिवार होली के त्यौहार का आयोजन करता है। दिन, मौसम और छुट्टियों के अनुसार तय किया जाता है। जब सबको सुविधा होती है इसलिए पूजा परिवार की होली का सबको इंतजार रहता है। होली भारत से बाहर भी एकता और खुशी का प्रतीक बन गया है। अटलांटिका में इस्कॉन द्वारा होली उत्सव बहुत विशाल स्तर पर मनाया जाता है। हिंदू धर्म की यही तो विशेषता है जो सब को धारण ही नहीं करती बल्कि इसमें लचीली व्यवस्था भी है। भारत में निश्चित दिन और विदेश में सुविधानुसार होली का आनन्द उठाया जाता है।
सांस्कृतिक आदान प्रदान के साथ पर्यटन तो होता ही है: नृत्य, गायन उत्सवों की शुरूआत भारत के मंदिरों में हुई थी। लेकिन अब देश विदेश से इन उत्सवों को देखने पर्यटक आते हैं। गीतों का आनंद उठाते हैं। मुंबई से लेकर कई राज्यों की होली देखी पर नोएडा में मनाई, पहली होली याद है। होली ने तो महानगरों में भारत को एक जगह कर दिया है।
नौकरी के कारण अलग अलग राज्यों से आए, नगरवासी जो परिवार में नहीं जा पाते, अब होली तो अकेले खेली नहीं जाती तो एक ही पार्क में बरसाने की लठ्मार होली, कुमांऊ की बैठकी, हरियाणा की धुलैंडी जिसमें देवर भाभी को सताता है और भाभी धुलाई करती है। मिलजुल कर मना लेते हैं। बंगाल में चैतन्य महाप्रभु का जन्मदिन जुलूस निकाल कर मनाते हैं। इस्कॉन मंदिरों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वह सांझी होली में भी मनाया। फिल्म के गीत और लोकगीत, रसिया और जोगीरा सारा.. रा.. रा.. के सवाल जवाब से तो सांझी होली जीवन में रंग भर देती है। दक्षिण भारतीयों ने होलिका दहन की राख माथे पर लगाई तो सबने उन्हें सूखे रंगो से रंग दिया। नार्थ ईस्ट में मणिपुर की दंत कथा के अनुसार रुक्मणी को भगवान कृष्ण, आम भाषा में कहते हैं, भगाकर ले गए थे। ज्यादातर इसी से संबंधित लोकगीत होते हैं और जहां कन्हैया हों वहां होली न हो ऐसा हो नहीं सकता!! वहां छ दिन पारंपरिक नृत्य लोक कथाओं पर चलते हैं। मणिपुरी नृत्य का कॉस्ट्यूम विश्व प्रसिद्ध है। इसलिए नार्थइस्ट वाले तालियों से साथ दे रहे होते हैं। रंगों का यह त्योहार भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है। पूर्वाेत्तर भारत असम में डोल जात्रा/फगुआ और स्थानीय जनजातीय उत्सव वसंत ऋतु के आगमन का जश्न मनाएंगे। यह समय प्रकृति के नवजीवन और क्षेत्रीय सांस्कृतिक समारोहों के लिए जाना जाता है।
होली/डोल जात्रा, पूरे पूर्वाेत्तर, विशेषकर असम और मणिपुर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा।
अरुणाचल प्रदेश (जैसे कि सिंक केन), मणिपुर (याओशांग) और अन्य राज्यों में वसंतकालीन उत्सव होने की प्रबल संभावना है। याओसांग मणिपुर के मेइती लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक जीवंत उत्सव है। यह एकता और सदभाव का प्रतीक है। बसंत के आगमन का स्वागत रंगीन पारंपरिक कपड़े पहनकर और नाच गा कर मनाते हैं।
केरल में होली को मंजल कुली कहते हैं जिसका मतलब हल्दी स्नान है।
डोलयात्रा सिक्किम का होली से मिलता जुलता उत्सव है और उसी दिन मनाया जाता है। यह राधा कृष्ण के प्रेम के जश्न के रूप में मनाया जाता है। राधा कृष्ण की मूर्तियों को जुलूस में ले जाया जाता है। लोग गुलाल उड़ाते हुए नाचते हैं। महिलाएं गाते हुए चलती हैं। पुरूष सभी पर रंग डालते हैं।
होला मोहल्ला विशेषकर आनंदपुर साहब में सिक्खों द्वारा मार्शल आर्ट एवं बहादुरी का प्रर्दशन है। होलगढ़ किले में रंग बिरंगे मुकाबले होते हैं। होली के पांचवें दिन महाराष्ट्र में मछुआरा समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन नृत्य गायन के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। इस जश्न को शिमगो के नाम से जाना जाता है। देश के कई हिस्सों में होली का उत्सव फाल्गुन पूर्णिमा को शुरू होकर रंग पंचमी को समाप्त होता है।
नवरात्र चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा हिन्दू नवसंवत्सर से शुरु होते हैं और इस वर्ष 19 मार्च से, देश भर में अलग अलग नाम से इन दिनों को उत्सव की तरह मनाने में प्रकृति का भी सहयोग होता है। पेड़ पौधे नई नई कोंपले और फूलों से लदे होते हैं। इसलिए इन्हें वासंती नवरात्र भी कहा जाता है। चैत्र नवरात्र में देवी के नौ रूपों की पूजा होती है।
चैत्र नवरात्र में देवी पूजन देशभर में सभी घरों में किया जाता है। श्री राम नवमी को भगवान राम का जन्मोत्सव भारतीय मंदिरों में विशेष रूप से मनाया जाता है।
गुड़ी पड़वा उत्सव महाराष्ट्रीयन और कोंकणी मनाते हैं। दक्षिण भारत के कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना में उगादी का पर्व मनाते हैं। मंदिर जाते हैं और एक विशेष भोजन पचड़ी बनाया जाता है। तेलगु और कन्नड़ हिन्दु परंपराओं में पचड़ी प्रतीकात्मक है कि आने वाले वर्ष में हमें सभी अनुभवों की अपेक्षा करनी चाहिए और उनका लाभ उठाना चाहिए। इसके बाद से दक्षिण भारत में आम खाना शुरु हो जाता है। गुड़ी पड़वा से अगले दिन चेटी चंड सिंधी हिन्दुओं का प्रमुख त्यौहार है। जिसे सिंधी झूलेलाल के जन्मदिन के रुप में मनाते हैं।
हमारी एक ही संस्कृति हमें जोड़ती है। ये देखकर ही तो कहते हैं कि भारत सभ्यताओं का नहीं, संस्कृति का राष्ट्र है। सभ्यताओं में संघर्ष हो सकता है पर संस्कृति हमें जोड़ती है।




